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बिजली एवं भूजल बचाने के साथ कृषि पैदावार बढ़ाने वाले वैकल्पिक मॉडल विकसित करें ः अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि

  • Post on 2019-03-14

जयपुर, । कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं गोपालन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री पवन कुमार गोयल ने कहा कि हमें बिजली एवं भूजल बचाने के साथ कृषि पैदावार बढ़ाने वाले वैकल्पिक मॉडल विकसित करना होगा। श्री गोयल बुधवार को जयपुर में होटल मेरियट में वल्र्ड बैंक की ओर से ‘भूजल, ऊर्जा और कृषि नेक्सस का नैदानिक अध्ययन’ विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। किसान की आय बढ़ाने और कृषि के उत्पाद जोखिम को कम करने के लिए आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री गोयल ने कहा कि खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए बहुआयामी प्रयास किया जा रहा है। कृषि में सोलर पम्प को बढ़ावा देकर स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा की ओर अग्रसर हो रहे हैं। दिनों-दिन सौर ऊर्जा सस्ती हो रही है जिससे किसान भी ज्यादा रूचि दिखा रहे हैं। अध्ययन के अनुसार राज्य में करीब 13 लाख किसान सोलर पम्प का उपयोग कर सकते हैं। इसे ज्यादा फायदेमंद बनाने के लिए डिस्कॉम के ग्रिड से जोड़कर बेहतर प्रबंधन के साथ प्रोत्साहन जरूरी है, ताकि किसान सिंचाई करने के बाद बची हुई सौर ऊर्जा डिस्कॉम को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सके। श्री गोयल ने कहा कि प्रदेश में पानी की काफी कमी है। कई क्षेत्र ड्राई जोन घोषित हो चुके हैं। इसलिए हमें ऎसे मॉडल पर विचार करना होगा जो बिजली की बचत के साथ भूजल भी बचाए और कृषि की उत्पादकता बढ़ाए। कार्यशाला में विचार-विमर्श के पश्चात् विभिन्न वैकल्पिक मॉडल विकसित करें जो कार्यान्वयन योग्य और सतत् हो, ताकि राज्य सरकार के साथ चर्चा कर उसे किसानों के हित में अपनाया जा सके। कार्यशाला में राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धात्मक परियोजना निदेशक डॉ. ओमप्रकाश ने विश्व बैंक की ओर से इस अध्ययन के द्वारा प्राप्त निष्कर्ष एवं भविष्य में कृषि क्षेत्र में सोलर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिभागियों की सहभागिता एवं उनके अनुभवों को साझा करने पर जोर दिया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने विभिन्न मॉडल प्रस्तुत कर सोलर ऊर्जा के साथ भूजल बचाने एवं कृषि उत्पादकता बढ़ाने के विकल्प प्रस्तुत किए। कार्यशाला में विश्व बैंक के श्री सत्यप्रिय, श्री मोहिन्द्र गुलाटी, श्री शिल्प वर्मा, श्री प्रिंस पुरोहित, नेहा दुर्गा सहित कृषि, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी, भूजल, जल संसाधन एवं डिस्कॉम अधिकारी मौजूद थे।