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30वे राष्टीय सड़क सुरक्षा सप्ताह का समापन समारोह सड़क दुर्घटना में घायलों की हालत देखकर भी जो न पसीजे, वह इंसान कहलाने लायक नहीं -परिवहन मंंत्री -परिवहन मंत्री ने कहा अधिकार के साथ कर्तव्य भी याद रखें -घायलाें की मदद करने वाले लोगों सहित कई श्रेणियों में करीब 60 संगठनों, एनजीओ, व्यक्तियों को किया सम्मानित

  • Post on 2019-02-10

जयपुर, । सड़क दुर्घटना में किसी घायल को देखकर, उनका निकलता खून देखकर, उनको परेशानी में देखकर भी अगर किसी का दिल नहीं पसीजे तो वह इंसान नहीं हो सकता। इन शब्दों के साथ परिवहन मंत्री श्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि अगर कोई सड़क पर घायल दिखे तो दूसरों से अपेक्षा छोड़कर स्वयं पहल करें। पुलिस, सुप्रीम कोर्ट और राज्य सरकार सभी ऎसे मददगार के साथ हैं। श्री खाचरियावास ने 30वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के समापन के अवसर पर रविवार को शास्त्रीनगर के साइंस पार्क में आयोजित समारोह में यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने इस अवसर पर बंगलौर में आईटी कम्पनी में कार्यरत श्री राघव अग्रवाल, मानसरोवर निवासी श्री अभिषेक श्रीवास्तव एवं सवाई मानसिंह अस्पताल के अधीक्षक डॉ.डी.एस.मीणा को गुड सेमेरिटन के रूप में सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों की सहायता के लिए सम्मानित भी किया। श्री खाचरियावास ने सड़क सुरक्षा सप्ताह के शुभारम्भ पर 4 फरवरी को ही जवाहर सर्किल पर हुए राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ऎसे व्यक्तियों को सम्मानित किए जाने की घोषणा की थी। श्री खाचरियावास ने कहा कि उनके साथ भी ऎसा कई बार हुआ जब वे दुर्धटना के घायलों को अपनी गाड़ी में लेकर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के घायलों की मदद एवं सड़क सुरक्षा के नियमों की पालना करना न सिर्फ हमारी जिम्मेदारी है बल्कि हमारा कर्तव्य भी है। अपने अधिकार के लिए सजग रहने वाले हर व्यक्ति को अपने इस कर्तव्य के प्रति भी जागरूक और संकल्पित रहना चाहिए। फैशन में हेलमेट, सीटबैल्ट नहीं लगाने, हेलमेट हाथ में लेकर चलने, ईयरफोन लगाकर सड़क पर चलने, तेज गति से वाहन चलाने जैसी लापरवाहियांं सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा बढा रही हैं और प्रदेश में औसतन हर घंटे एक मौत हो रही है। इसे रोकने के लिए शुरूआत स्वयं से और आज से ही करें। वेे स्वयं सीट बैल्ट और हेलमेट लगाकर ही वाहन चलाते हैं।