नई दिल्ली । भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा है कि चुनाव आयोग आरबीएम पर बहस कराकर राजनीतिक दलों को उलझाने का प्रयास तो नहीं कर रहा है। ईवीएम की मूल बहस को किनारे करने के लिए विपक्षी दलों को नई बहस में उलझाने की कोशिश भी विपक्षी दल मान रहे हैं।
उन्होंने आरबीएम मशीन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता को यह चुनने का हक क्यों नहीं दिया जाता हैकि वह अपना वोट अपने मूल स्थान पर देगा या जहां जाकर बस गया हैवहां देगा। उन्होंने कहा चुनाव कई चरण में होते हैं। ऐसे में माइग्रेंट वोटर किस तरह अपने वोट का इस्तेमाल करेगा। 6 माह नागरिक किसी भी स्थान पर रहता है वहां उसे मतदाता का अधिकार मिल जाता है।
उन्होंने कहा 543 लोकसभा की सीटों पर किस तरह से आरबीएम का इस्तेमाल होगा। आयोग ने यह कहा है कि इन मशीनों को इंटरनेट से नहीं जोड़ा जाएगा। 72 सीटों पर एक ही आरबीएम में वोट देने के लिए जो प्रोग्राम संचालित किया जाएगा। ऐसी प्रोग्रामिंग मतदाता के मतदान में कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। इसकी गारंटी कैसे होगी।
कुरैशी ने कहा यह अच्छी बात है कि चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श शुरू किया है। उनका सुझाव था कि राजनीतिक दलों की आम सहमति बनने के बाद ही इस प्रक्रिया को लागू किया जाना चाहिए।
