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गहलोत पर फैसला नहीं कर पा रही कांग्रेसl
January 17, 2023 1 minute read
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जयपुर। राजस्थान में इस साल विधानसभा के चुनाव हैं। कांग्रेस समेत सभी पार्टियों ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बीच कांग्रेस अपने पुराने संकट से ही नहीं उबर पा रही है। राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच घमासान जगजाहिर है। चुनाव नजदीक आते देख सचिन पायलट और अशोक गहलोत ने अलग-अलग चुनावी कैंपेन भी शुरू कर दिया है। वहीं सितंबर 2022 में पार्टी के अंदर हुए घमासान पर गांधी परिवार अशोक गहलोत पर कोई कड़ा फैसला नहीं कर पा रही है। राजस्थान कांग्रेस में सितंबर 2022 में पार्टी के अंदर जमकर बवाल हआ था। सिंतबर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मनमुटाव भी सामने आया था। तब अजय माकन और मल्लिकार्जुन खरगे को राज्य का पर्यवेक्षक बनाया गया था। दोनों ही शीर्ष नेताओं ने पार्टी के अंदर मचे घमासान की रिपोर्ट आलाकमान सोनिया गांधी को सौंपी थी। वहीं अब इस पूरे मामले पर मल्लिकार्जुन खरगे और गांधी परिवार के बीच पहले विवाद का विषय राजस्थान संकट बन रहा है। गांधी परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते राजस्थन में जो किरकिरी हुई उसके गवाह खुद मल्लिकार्जुन खरगे भी हैं। इसलिए उसी हिसाब से उनको फैसला कर लेना चाहिए। वहीं खरगे के करीबियों का कहना है कि मामला सोनिया गांधी की अध्यक्षता के वक्त का है इसलिए जो वो कहेंगी उसी आधार पर फैसला कर दूंगा। गांधी परिवार के करीबी सूत्रों की मानें तो खरगे का यही रुख से गांधी परिवार को रास नहीं आ रहा है। उनके मुताबिक जब सब खरगे के सामने हुआ। वो खुद 25 जुलाई को बतौर पर्यवेक्षक जयपुर गए थे तो उनको उसी आधार पर फैसला करना चाहिए। गांधी परिवार खुद थोड़ी उनको बोलेगा सूत्रों के मुताबिक गांधी परिवार चाहता है कि वो न्यूट्रल रहे लेकिन जयपुर में जो हुआ उस पर फैसला हो यानी सीएम अशोक गहलोत पर गाज गिरे। शायद इसीलिए राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में सचिन पायलट को उनसे बार-बार मिलने का मौका मिल रहा है। आखिरी मुलाकात के बाद सचिन पायलट की 5 दिन की किसान यात्रा जनसभा और कार्यकर्ता सम्मेलन पर निकल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी सरकार के कामकाज की समीक्षा करने के लिए चिंतन शिविर करने जा रहे हैं