नई दिल्ली । गाय को यदि बांसुरी की धुन सुनाते हैं तो वह अधिक दूध देती है। इस तथ्य का खुलासा एक शोध में हुआ है। हालांकि कहा गया है कि भगवान कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर गायें दौड़ी चली आती थी। लेकिन अब वैज्ञानिक दृष्टि से भी ये सत्य साबित हो रही है। दुनिया भर में हो रहे जलवायु परिवर्तन से दुधारू पशुओं को तनाव रहित रखने के लिए पारम्परिक तरीकों पर शोध किया है। करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसन्धान संस्थान में ऐसा ही शोध किया जा रहा है जिसमे दुधारू पशुओं को रोजाना बांसुरी अथवा अन्य मधुर संगीत की धुन सुनाई जाती है। संगीत सुनने वाले पशुओं का न केवल स्वास्थ्य बेहतर रहता है अपितु उन का दूध उत्पादन भी बढ़ा है। इस बारे में संस्थान के वरिष्ठ पशु वैज्ञानिक ने कहा कि काफी समय पहले सुना था कि गायों को संगीत एवं भजन काफी पसंद होते हैं। हमने जब यह विधि अपनाई तो उसका परिणाम काफी अच्छा निकला है। एक शोध के अनुसार विदेशी गायों के मुकाबले देसी गायों में मातृत्व की भावना अधिक होती है।
विशेषज्ञ ने कहा कि संगीत की तरंगें गाय के मस्तिष्क में ऑक्सीटोसिन हार्मोंस को सक्रिय करती है और गाय को दूध देने के लिए प्रेरित करती है।
गौरतलब है कि वर्ष 1955 में स्थापना के बाद से एनडीआरआई में पशुओ पर काफी शोध किये जा रहे है। यहां स्थित जलवायु प्रतिरोधी पशुधन अनुसंधान केंद्र में जहां वैज्ञानिक लगातार पशुओं पर प्रयोग कर रहे हैं। जिस तरह से वातावरण में बदलाव हो रहा है उससे पशुधन पर क्या प्रभाव पड़ेगा उस पर लगातार कृषि वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं। देसी गायों की नस्लों पर अलग-अलग प्रकार के प्रयोग कर रहे हैं, जिससे दूध की उत्पादकता को बढ़ाया जा सके। एक्सपर्ट के अनुसार हम पशु को एक ही जगह पर बांध कर रखते हैं तो वह तनाव में आ जाता है। लेकिन खुला रखते हैं तो पशु अपने आपको रिलैक्स फील करता है। जिसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं।
