इंदौर 31 जनवरी 2026। यूसीकॉन 2026 के तीसरे दिन इंदौर में चिकित्सा विज्ञान का ऐसा भविष्य दिखाई दिया, जहां इंसानी अनुभव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साथ मिलकर इलाज की नई परिभाषा गढ़ते नजर आए। सुबह से ही ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के हर हॉल में डॉक्टरों, सर्जनों और शोधकर्ताओं की हलचल थी। कहीं रोबोटिक सर्जरी की नई तकनीकों पर चर्चा चल रही थी, तो कहीं मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स की मदद से बीमारी को पहले पहचानने के तरीके समझाए जा रहे थे। देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने माना कि आने वाले दशक में चिकित्सा केवल हाथों की कला नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी की सटीकता का भी मेल होगी, और Day-3 इसी ‘फ्यूचर रेडी यूरोलॉजी’ को समर्पित रहा।
दिन की शुरुआत से ही एडवांस्ड सेशन्स, केस-बेस्ड डिस्कशन और टेक्निकल डेमो ने माहौल को पूरी तरह अकादमिक बना दिया। बड़े-बड़े स्क्रीन पर जटिल सर्जरी की बारीकियां समझाई गईं, रोबोटिक आर्म्स की सटीकता दिखाई गई और यह बताया गया कि कैसे लेजर और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों से मरीजों को कम दर्द, कम ब्लड लॉस और जल्दी रिकवरी मिल रही है। युवा डॉक्टरों के लिए यह दिन किसी लाइव क्लासरूम से कम नहीं था, जहां वे किताबों से नहीं बल्कि असली सर्जरी देखकर सीख रहे थे। विशेषज्ञों ने बताया कि अब एआई की मदद से सर्जरी की प्लानिंग पहले से अधिक सटीक हो रही है, जिससे ऑपरेशन का समय घट रहा है और सफलता दर बढ़ रही है।इसी टेक्नोलॉजी फोकस के बीच तीसरे दिन 3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी पर भी एक महत्वपूर्ण चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि अब 3डी प्रिंटिंग की मदद से मेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स, इम्प्लांट्स और सर्जरी-स्पेसिफिक मॉडल तैयार करना संभव हो गया है। हालांकि यह तकनीक कुछ महंगी है, पर इसकी सटीकता और कस्टमाइजेशन क्षमता इसे बेहद प्रभावी बनाती है। डॉक्टरों ने समझाया कि 3डी प्रिंटेड मॉडल सर्जन को ऑपरेशन से पहले मरीज के शरीर की संरचना को बिल्कुल वास्तविक रूप में समझने में मदद करते हैं, जिससे सर्जरी का समय घटता है, जटिलताओं का जोखिम कम होता है और मरीज की रिकवरी बेहतर होती है। आने वाले समय में 3डी प्रिंटिंग ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स और पार्ट्स तैयार करेगी जो पूरी तरह मरीज की जरूरत के मुताबिक होंगे—और यही इसे ‘फ्यूचर मेडिसिन’ का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है।
तीसरे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा अमेरिका से आए विश्वप्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. महेंद्र भंडारी का कीनोट संबोधन। उनका व्याख्यान सुनने के लिए हॉल खचाखच भरा रहा। उन्होंने कहा कि आने वाला समय ‘स्मार्ट सर्जरी’ का होगा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डॉक्टरों का सहयोगी बनेगा। उन्होंने समझाया कि कैसे डेटा आधारित निर्णय, रोबोटिक प्रिसिजन और ह्यूमन टच मिलकर मरीजों को बेहतर जीवन देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि “तकनीक डॉक्टर की जगह नहीं लेगी, बल्कि डॉक्टर को और सक्षम बनाएगी,” और इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे देश में नई तकनीक का सही उपयोग लाखों मरीजों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
दिनभर के वैज्ञानिक सत्रों के बीच आयोजन समिति ने आम जनता के लिए भी स्वास्थ्य जागरूकता पर विशेष जोर दिया। विशेषज्ञों ने बताया कि आजकल प्रोस्टेट की समस्या, किडनी स्टोन, पेशाब में इंफेक्शन, ब्लैडर और किडनी कैंसर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और ज्यादातर लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। डॉक्टरों ने समझाया कि पेशाब में जलन या खून आना, बार-बार पेशाब लगना, कमर या पेट में तेज दर्द, रात में कई बार उठना या पेशाब रुक-रुक कर आना जैसे संकेत गंभीर समस्या की शुरुआत हो सकते हैं। समय पर जांच और विशेषज्ञ से सलाह लेने पर इन बीमारियों का इलाज आसान और कम खर्चीला हो सकता है। उन्होंने लोगों से ज्यादा पानी पीने, नियमित व्यायाम करने, जंक फूड और तंबाकू से बचने और 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित हेल्थ चेकअप कराने की अपील की।
शाम होते-होते वैज्ञानिक माहौल सांस्कृतिक रंग में बदल गया। प्रसिद्ध संगीत जोड़ी ‘सचेत-परंपरा’ की लगभग दो घंटे की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को उत्सव में बदल दिया। दिनभर गंभीर चर्चाओं में व्यस्त डॉक्टर भी संगीत की धुनों पर झूमते नजर आए। देश-विदेश से आए मेहमानों ने कहा कि इंदौर ने उन्हें ज्ञान के साथ-साथ आत्मीयता और मनोरंजन का भी बेहतरीन अनुभव दिया। इस सांस्कृतिक संध्या ने साबित कर दिया कि यह आयोजन केवल मेडिकल कॉन्फ्रेंस नहीं, बल्कि सीख और आनंद का संतुलित उत्सव है।
ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. सुशील भाटिया ने कहा कि* यूसीकॉन का तीसरा दिन भविष्य की चिकित्सा को समर्पित रहा और यहां दिखाई गई AI व रोबोटिक तकनीकें आने वाले वर्षों में मरीजों के इलाज का तरीका पूरी तरह बदल देंगी। उन्होंने बताया कि इंदौर अब केवल एक मेजबान शहर नहीं, बल्कि मेडिकल इनोवेशन का केंद्र बनता जा रहा है, जहां से नई सोच और नई तकनीक पूरे देश में पहुंचेगी।ऑर्गनाइजिंग कमेटी के चेयरमैन डॉ. संजय शिंदे ने कहा कि* उनका उद्देश्य केवल डॉक्टरों की बैठक कराना नहीं, बल्कि ऐसी दिशा देना है जिससे स्वास्थ्य सेवाएं ज्यादा मानवीय और सुलभ बनें। उन्होंने कहा कि जब टेक्नोलॉजी और संवेदनशीलता साथ आती है, तभी असली इलाज संभव होता है और यूसीकॉन उसी विचारधारा को आगे बढ़ा रहा है।ऑर्गनाइजिंग कमेटी के ट्रेज़रर डॉ. नितीश पाटीदार ने बताया कि* इतने बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी, आधुनिक उपकरण और विश्वस्तरीय सत्रों का इंदौर में होना शहर की बढ़ती मेडिकल क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इससे मेडिकल टूरिज्म और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और इंदौर आने वाले समय में इलाज का भरोसेमंद केंद्र बनेगा।
को-ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. रवि नागर ने कहा कि हर सत्र को इस तरह तैयार किया गया है कि डॉक्टर सीधे प्रैक्टिकल सीख सकें और वही तकनीक छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचा सकें, ताकि बेहतर इलाज हर व्यक्ति को मिल सके।
को-ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. श्याम अग्रवाल ने कहा कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, असली ताकत जागरूकता में है। यदि लोग शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय पर जांच कराएं तो अधिकांश यूरोलॉजी बीमारियां आसानी से ठीक हो सकती हैं, और यही संदेश USICON पूरे समाज तक पहुंचा रहा है।
चौथे दिन 1 फरवरी को इंदौर मैराथन के साथ ‘Pass the Baton of Life’ थीम पर विशेष रन आयोजित की जाएगी, जिसमें डॉक्टर, डेलीगेट्स और नागरिक मिलकर ऑर्गन डोनेशन और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देंगे। इसी दिन यूरोपियन बोर्ड एग्जाम और विभिन्न शैक्षणिक मूल्यांकन सत्र भी आयोजित होंगे, जहां देश-विदेश के युवा डॉक्टर अपनी विशेषज्ञता को परखेंगे। आयोजकों के अनुसार अंतिम दिन ‘फिटनेस, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी’ को समर्पित रहेगा।
