नोटबंदी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर न्यायमूर्ति नजीर की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई कर रही थी
नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नोटबंदी के दौरान सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। आरबीआई ने कहा कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के दौरान 1000 रुपए और 500 रुपए के नोटों को प्रतिबंधित करने का निर्णय लेते समय आरबीआई अधिनियम 1934 की धारा 26 (2) में निर्धारित प्रक्रिया का विधिवत पालन किया गया था। नोटबंदी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई कर रही थी। बेंच में जस्टिस बीआर गवई एएस बोपन्ना वी रामासुब्रमण्यम और बीवी नागरथना भी शामिल हैं। इस दौरान आरबीआई की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि हमने हलफनामे पर कहा है कि नियमों द्वारा निर्धारित कोरम पूरा हो गया था। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कदम पर विचार-विमर्श फरवरी 2016 में शुरू हुआ था लेकिन इसकी गोपनीयता बनाई रखी गई थी। वहीं याचिकाओं ने तर्क दिया गया कि आरबीआई अधिनियम की धारा 26 (2) के तहत नोटबंदी की सिफारिश आरबीआई से आई होगी लेकिन 2016 में ऐसा नहीं था। सरकार की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने कहा कि सरकार इन तीन बुराइयों को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि हमें नोटबंदी के पहले विस्तृत अध्ययन करना चाहिए था। एक दशक से अधिक समय से केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया तीन बुराइयों को देख रहे हैं। ये जरासंघ की तरह हैं और आपको इसे टुकड़ों में काट देना चाहिए। यदि आप ऐसा नहीं करेंगे तो ये बुराइयां हमेशा जीवित रहेंगी। वहीं गुप्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम के इस आरोप का भी जवाब दिया कि केंद्र ने अब तक आरबीआई को 7 नवंबर के पत्र और 8 नवंबर के कैबिनेट के फैसले सहित कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं और ना ही उन सबका विवरण दिया गया जो आरबीआई सेंट्रल बोर्ड की बैठक में शामिल हुए। चिदंबरम ने यह भी सवाल किया कि क्या कोरम अधिनियम के तहत आवश्यक के रूप में पूरा किया गया था। चिदंबरम ने पूछा कि सरकार कोर्ट को कागजात क्यों नहीं दिखा रही है। इस पर अटॉर्नी जनरल ने जवाब दिया कुछ छुपाया नहीं जा रहा है। अगर अदालत इसके लिए कहती है तो हम कोर्ट को जरूर दस्तावेज दिखाएंगे।
