जयपुर । भारत में 2 लाख से अधिक गायों की मौत हो चुकी है।पिछले कई महीनों से लम्पी वायरस का कहर विभिन्न राज्यों में फैलता जा रहा है। इसकी रोकथाम के लिए राज्य सरकारों द्वारा कोई विशेष प्रयास नहीं किए गए। जिसके कारण लाखों की संख्या में गायों की मौत, असहनीय पीड़ा से हो गई।
राजस्थान और गुजरात में लम्पी वायरस से लड़ने के लिए 5 रुपये की मिथेलिन ब्लू नामक नीली दवा लंप्पी वायरस से पीड़ित गायों में मुफीद साबित हुई। इसका सफल ट्रायल भी हुआ। केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय ने 31 अगस्त की जारी गाइड लाइन में इसे इलाज के प्रोटोकॉल में शामिल कर लिया था। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की लापरवाही से गायों की मौत होती रही।
गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों में बड़े पैमाने पर इस दवा का उपयोग कर गायों की जान बचाई जा सकती थी, वह नहीं बचाई गई। राज्यों ने भी इस दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं किए।
मिथेलिन ब्लू दवा का ट्रायल
राजस्थान के जालौर और सांचोर में 2500 गायों में इस दवा का ट्रायल किया गया था। 1 ग्राम दवा 1 लीटर पानी में घोलकर गायों को दी गई थी। 85 फ़ीसदी सामान्य प्रभावित, 75 फ़ीसदी मध्यम प्रभावित और 50 फ़ीसदी गंभीर रूप से प्रभावित गाएं इस दवा से ठीक हो गईं। स्वस्थ गायों को यह दवा देने पर 90 फ़ीसदी गाय संक्रमित नहीं हुई।
गुजरात के भावनगर में भी इस दवा का ट्रायल किया जा चुका है। इसके बाद भी राज्य सरकारों द्वारा गायों को मौत से बचाने के लिए लगातार लापरवाही बरती गई।
सामाजिक कार्यकर्ता साधना कर्निक प्रधान, जगदीप काकडीया डॉक्टर दीपक गोलवलकर और अश्विन पटेल ने रिसर्च और जागरूकता को लेकर काफी प्रयास किए। किंतु उनके अथक प्रयास के बाद भी लाखों गायों की जान नहीं बच पाई।
