जी 23 के चर्चित नेता गुलाम नबी आजाद दो पाटों के बीच में बुरी तरह फंस गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने, गुलाम नबी आजाद को महत्व देते हुए, उनके समर्थक विकार रसूल वानी को जम्मू कश्मीर का अध्यक्ष बनाया था। कांग्रेस में गुलाम नबी आजाद को प्रदेश कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी।
पिछले कुछ माहों में गुलाम नबी आजाद की नजदीकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बीच बढ़ गई हैं। जम्मू कश्मीर में सरकार गुलाम नबी आजाद को कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने जा रही है। कांग्रेस ने आजाद को देरी से समझा। गुलाम नबी आजाद के सामने कांग्रेस में रहने का कोई औचित्य नहीं रहा। राहुल गांधी कश्मीर से कन्याकुमारी तक पद यात्रा निकाल रहे हैं। जिसमें जोखिम भी है। सरकार की नाराजगी भी झेलना पड़ सकती है। इस स्थिति में उन्होंने कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष और राजनीतिक मामलों की कमेटी से इस्तीफा देकर किनारा कर लिया है। स्वास्थ्य का हवाला देकर कांग्रेस से दूरियां बनाने की कोशिश की है। जानकारों का मानना है, गुलाम नबी आजाद निर्णय नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें कांग्रेस में बने रहना है। या सरकार के साथ जाना है।
