**लेखक: संजय अग्रवाल**
**प्रदेश अध्यक्ष, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन, मध्य प्रदेश**
देश की राजनीति में आजकल जो नाटक चल रहा है, वह देखकर हंसी भी आती है और गुस्सा भी। लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी जी ने अचानक “बहुजन चेतना के प्रकाशस्तंभ” और “सामाजिक न्याय के योद्धा” कहकर मान्यवर काशीराम जी को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से की है। पत्र लिखा, सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, और अब हर जगह यही चर्चा है। लेकिन सवाल यह है – यह अचानक जागृत हुआ “दलित प्रेम” कहां से आया? और सबसे बड़ा सवाल – जब कांग्रेस की सरकारें थीं, तब यह सम्मान क्यों नहीं दिया गया?
मैं, संजय अग्रवाल, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में, इस पूरे ड्रामे पर खुलकर बोलना चाहता हूं। कांग्रेस ने कभी भी असली सामाजिक न्याय के नायकों को सम्मान नहीं दिया। डॉ. भीमराव अंबेडकर जी – भारतीय संविधान के शिल्पकार, दलितों के मसीहा – को भारत रत्न कब मिला? 1990 में, जब वी.पी. सिंह की सरकार थी और भाजपा ने बाहर से समर्थन दिया था। कांग्रेस ने 1947 से लेकर 2014 तक दशकों तक सत्ता संभाली, लेकिन अंबेडकर जी को भारत रत्न देने का एक भी अवसर नहीं बनाया। उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय अवकाश तक नहीं बनाया। बस चुनावों में उनका नाम लेकर वोट मांगते रहे।
अब काशीराम जी की बारी। 2006 में उनका निधन हुआ। तब केंद्र में कांग्रेस की यूपीए सरकार थी – पूरे 10 साल (2004-2014)। एक दिन का राष्ट्रीय शोक तक घोषित नहीं किया! कोई पद्म पुरस्कार, कोई भारत रत्न – कुछ नहीं। लेकिन आज राहुल जी पत्र लिख रहे हैं, “कृपया सम्मानित कीजिए”। अरे भाई, जब तुम्हारी सरकार थी तब क्यों नहीं दिया? क्योंकि तब वोट बैंक की जरूरत नहीं थी? या बस “परिवार” की सेवा में व्यस्त थे?
गांधी परिवार को देखिए – इंदिरा गांधी को 1971 में भारत रत्न (उनके अपने राज में), राजीव गांधी को 1991 में मरणोपरांत (फिर कांग्रेस के राज में)। नेहरू जी को 1955 में मिल ही गया। लेकिन असली योद्धा – अंबेडकर, , पटेल, और अब काशीराम – इनके लिए कांग्रेस की “सोशल जस्टिस” सिर्फ चुनावी मौसम में उभरती है।
राहुल जी सोच रहे होंगे कि अगर कल को कांग्रेस की सरकार आ गई तो हम खुद भारत रत्न” लेकर गांधी परिवार की पूर्ति कर लेंगे। इतिहास गवाह है – कांग्रेस की सत्ता में “भला सिर्फ परिवार के लिए होते हैं। दलितों, पिछड़ों, वंचितों को तो बस “मुस्लिम-दलित-ओबीसी” के वोट बैंक में बांटकर रखा जाता है। BSP की मायावती जी ने भी यही सवाल उठाया है कि अंबेडकर को नहीं दिया तो काशीराम को कैसे दोगे?
यह सब देखकर लगता है कि यह मांग सच्ची नहीं, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश चुनावों का एक और “वोट बैंक ड्रामा” है। जब सत्ता में थे तब अनदेखी, अब सत्ता नहीं है तो डिमांड। और अगर सत्ता आई तो? वही पुराना खेल – वादे तो कर लेंगे, लेकिन पूर्ति? परिवार पहले, देश बाद में।
देश की जनता अब जाग चुकी है। असली सम्मान मोदी सरकार ने दिया है – पिछले वर्षों में कई गैर-कांग्रेसी नायकों को भारत रत्न मिला है। लेकिन कांग्रेस की यह हाइपोक्रिसी अब नहीं चलेगी। राहुल जी, अगर सच में काशीराम जी का सम्मान करना है तो पहले अपनी पार्टी के 55साल के रिकॉर्ड पर जवाब दीजिए। वरना यह पत्र सिर्फ राजनीतिक स्टंट लगता है।
**जय हिंद! जय भारत!**
**संजय अग्रवाल**
प्रदेश अध्यक्ष, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन
मध्य प्रदेश
