नलखेड़ा – झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ लगातार समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित होने के बाद बीते शुक्रवार को खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव ने नगर के तीन क्लीनिक सील कर भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयाँ, इंजेक्शन और अन्य सामग्री जप्त कर पंचनामा बनाया था।लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि, कार्रवाई के महज़ तीन दिन बाद ही तीनों क्लीनिक दोबारा खुल गए और झोलाछाप डॉक्टरो द्वारा खुलेआम मरीजों का इलाज किया जा रहा है। यह साफ तौर पर इशारा करता है कि, बीएमओ की कार्रवाई महज़ दिखावा बनकर रह गई और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी झोलाछाप डॉक्टरो के सामने बौने साबित हो गए।
स्थानीय लोगों मैं यह जन चर्चा का विषय बना हुआ है कि, जब तीन दिन भी सीलिंग बरकरार नहीं रह सकी तो यह स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन की नाकामी नहीं, बल्कि सीधी मिलीभगत है। सवाल उठता है कि आखिर इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद क्लीनिक कैसे दोबारा चालू हो गए? क्या पंचनामा और ज़ब्त की गई सामग्री केवल कागज़ी खानापूर्ति थी? या फिर यह पूरा खेल ऊपरी दबाव और राजनीतिक संरक्षण का नतीजा है?
डॉ. विजय यादव लगभग पिछले 22 वर्षों से नलखेड़ा में पदस्थ हैं, लेकिन झोलाछापों पर उनकी कार्रवाई का कोई असर, न होना यह साबित करता है कि, स्वास्थ्य विभाग खुद लाचार और समझौतापरस्त हो चुका है।
लोगों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य विभाग झोलाछापों के आगे स्वयं को इतना कमजोर महसूस करता है तो पदेन बीएमओ को पद की गरिमा का ध्यान रखते हुऎ तुरंत अन्य अधिकारी को चार्ज दे देना चाहिए । वरना यह स्पष्ट है कि, झोलाछाप और प्रशासन की मिलीभगत से आम जनता की जान के साथ खिलवाड़ होता रहेगा और सारी कार्रवाई केवल अख़बार की सुर्ख़ियों तक ही सीमित रह जाएगी।
