‘स्वतंत्रता के 75 साल बाद भी औपनिवेशिक काल के कई कानून बोझ की तरह बने हुए थे
मालवांचल यूनिवर्सिटी में नए कानूनों को लेकर सेमिनार में पुलिस अधिकारियों ने लोगों को जागरूक किया
इंदौर पुलिस ने मालवांचल यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर युवाओं और ग्रामीणों को सिखाया नए कानून का पाठ
इंदौर। देशभर में एक जुलाई से लागू हो रहा नया कानून, नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए है, इसलिए आप सभी इसमें पारंगत हो जाएं। उससे पहले हमें इसे अच्छे से समझना होगा। इसी उद्देश्य से इंदौर पुलिस और मालवांचल यूनिवर्सिटी इंडेक्स समूह संस्थान में नवीन आपराधिक अधिनियम 2023 के संबंध में सेमिनार का आयोजन किया। इस सेमिनार में इंडेक्स समूह संस्थान के छात्र,ग्रामीण और बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर इंदौर पुलिस डीआईजी निमिष अग्रवाल,एसपी हितिका वासल,डीएसपी उमाकांत चौधरी,एडीपीओ उदल सिंह मौर्या,थाना प्रभारी खुड़ैल दीपक खत्री ने छात्रों और ग्रामीणों को नए कानून की जानकारी दी। इस अवसर पर इंडेक्स समूह के चेयरमैन सुरेशसिंह भदौरिया,मालवांचल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ.संजीव नारंग,रजिस्ट्रार डॉ.लोकेश्वर सिंह जोधाणा,इंडेक्स मेडिकल कॉलेज डीन डॉ.जीएस पटेल,डायरेक्टर आर एस राणावत,एडिशनल डायरेक्टर आर सी यादव ने सभी पुलिस अधिकारियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए। इस अवसर पर खुड़ैल सहित विभिन्न गांवों के सरपंच और ग्रामीण भी सेमिनार में शामिल हुए।
ई-एफआईआर से ऑनलाइन फैसले और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ट्रायल तक की सुविधा
डीआईजी निमिष अग्रवाल ने कहा कि देशभर में सोमवार से तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए है। जिससे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में व्यापक बदलाव आएंगे और ब्रिटिश काल के कानूनों का अंत हो गया। स्वतंत्रता के 75 साल बाद भी औपनिवेशिक काल के कई कानून बोझ की तरह बने हुए हैं। अब भारत की आत्मा और भावना को प्रमुख आपराधिक कानूनों, भारतीय न्याय संहिता,भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता में शामिल कर दिया गया है।नए कानूनों से एक आधुनिक न्याय प्रणाली स्थापित होगी जिसमें ‘जीरो एफआईआर’, पुलिस में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराना, ‘एसएमएस’ (मोबाइल फोन पर संदेश) के जरिये समन भेजने जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम और सभी जघन्य अपराधों के वारदात स्थल की अनिवार्य वीडियोग्राफी जैसे प्रावधान शामिल होंगे।ई-एफआईआर से ऑनलाइन फैसले और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ट्रायल तक की सुविधा भी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि हम मालवांचल यूनिवर्सिटी.इंडेक्स समूह संस्थान का आभार मानते है कि इन्होंने सामाजिक पहल के साथ ग्रामीण और छात्रों को नए कानून के प्रति जागरूक करने के लिए इतने वृहद स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया। सभी छात्र,शिक्षक और डॅाक्टर्स को उन्होंने डॉक्टर्स डे की बधाई भी दी।
इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यम से भी होंगी रिपोर्ट दर्ज
एसपी हितिका वासल ने कहा कि आज के युवा वर्ग को अपने देश के नए कानून की जानकारी होना सबसे जरूरी है। कई बार हमें अपना थाना कौनसा है इसकी भी जानकारी नहीं होती है। ऐसे समय में पुलिस और शिक्षण संस्थाएं,संगठनों की जिम्मेदारी है कि नए कानून के प्रति सभी लोगों को जागरूक करें। उन्होंने बताया कि नए कानूनों के तहत अब एफआईआर दर्ज कराने के लिए व्यक्तिगत रूप से थाने तक जाने की जरूरत नहीं होगी। इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन यानी फोन या मैसेज के जरिए भी ये काम हो सकेगा।हमारी जिंदगी में बढ़ते तकनीकी के दखल को देखते हुए इन कानूनों में भी तकनीकी के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर एक नया अध्याय जोड़ा गया है, किसी बच्चे को खरीदना और बेचना जघन्य अपराध बनाया गया है।
डीएसपी उमाकांत चौधरी ने बताय़ा कि नए कानून की आने के साथ ही प्रक्रिया में बड़े स्तर पर बदलाव होने वाले हैं, जैसे में अब किसी व्यक्ति को अगर एफआईआर दर्ज कराना है, तो उसे पुलिस स्टेशन नहीं जाना होगा। साथ ही तलाशी और जब्ती करने के दौरान वीडियोग्राफी करना होगा।इस नई व्यवस्था के लिए तहत अपराध की तत्काल रिपोर्टिंग और पुलिस को तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। जीरो एफआईआर के आने के बाद अब कोई भी व्यक्ति किसी भी पुलिस स्टेशन से एफआईआर दर्ज करा सकेगा।
सरकारों को गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी कड़े निर्देश
एडीपीओ उदल सिंह मौर्या ने बताया कि तीन नए कानूनों को पिछले साल दिसंबर में संसद में पारित किया गया था। अंग्रेजों के जमाने से चल रहे तीन मुख्य आपराधिक कानूनों की जगह अब नए कानून देशभर में प्रभावी हो गए। नए कानूनों में राज्य सरकारों को गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत राज्यों में गवाहों की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया ताकि कानूनी कार्यवाही में भरोसा बढ़े। महिलाओं, पंद्रह वर्ष की आयु से कम उम्र के लोगों, 60 वर्ष की आयु से अधिक के लोगों तथा दिव्यांग या गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को पुलिस थाने आने से छूट दी जाएगी और वे अपने निवास स्थान पर ही पुलिस सहायता प्राप्त कर सकते हैं। नए कानूनों के तहत पीड़ितों को 90 दिन के भीतर अपने मामले की प्रगति पर नियमित रूप से जानकारी पाने का अधिकार होगा।भारतीय दंड संहिता में 511 धाराएं थीं, लेकिन भारतीय न्याय संहिता में धाराएं 358 हैं। दरअसल ‘ओवरलैप’ धाराओं का आपस में विलय कर दिया गया तथा उन्हें सरलीकृत किया गया है। जिससे भारतीय दंड संहिता की 511 धाराओं के मुकाबले इसमें केवल 358 धाराएं होंगी। नए कानूनों में, महिलाओं व बच्चों के साथ होने वाले अपराध पीड़ितों को सभी अस्पतालों में निशुल्क प्राथमिक उपचार या इलाज मुहैया कराया जाएगा।यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि पीड़ित को आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल तुरंत मिले। इस अवसर पर वाइस डीन डॉ.प्रेम न्याती,प्राचार्या डॉ.स्मृति जी सोलोमन,प्राचार्या डॉ.रेशमा खुराना,प्राचार्या डॉ.सुपुर्णा गांगुली,एचआर डायरेक्टर रुपेश वर्मा,आईक्यूएसी डायरेक्टर डॅा.रोली अग्रवाल सहित मालवांचल यूनिवर्सिटी और इंडेक्स समूह संस्थान की ओर से विभिन्न अधिकारी और शिक्षक उपस्थित थे।
