( अमिताभ पाण्डेय )
इन दिनों भोपाल से दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री बनने के लिए आधा दर्जन से अधिक दावेदार हर संभव प्रयास करने में लगे हैं वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा की विजय के लिए जिलों के प्रवास पर निकल पड़े हैं ।
उनकी कोशिश अब लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी 29 सीट पर भाजपा को महाविजय दिलाना है।
गत दिवस छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 29 कमल की विजयमाला भेंट करेंगे।
ऐसा भाजपा के संगठित और समर्पित कार्यकर्ताओं की मेहनत से संभव होगा छिंदवाड़ा के बाद अगले दिन उन्होंने शिवपुरी में लाडली बहनों से आत्मीय संवाद किया।
अपनी सभा में मुख्यमंत्री का पूरा जोर इस बात पर होता है कि अगले चुनाव में अधिक से अधिक मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में किया जाए।
वे इसके लिए बेटी पढ़ाओ – बेटी बचाओ योजना, लाडली लक्ष्मी योजना, लाडली बहना योजना जैसी अनेक योजनाओं का भी बखूबी बयान करते हैं ।
इनका लाभ समाज के बिछड़े कमजोर वर्ग के लोगों को खूब मिल रहा है।
इन योजनाओं की लोकप्रियता ऐसी है कि शिवराज जहां जाते हैं वहां महिलाएं भारी संख्या में अपने भैया का, मामा का अभिनंदन करने आ जाती हैं ।
आपको बता दें कि पिछले वर्षों में मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए शिवराज ने जो योजनाएं चलाई वे पिछड़े – कमजोर वर्गों को सीधे लाभ देने वाली थी ।
इसका लाभ भाजपा को बहुत मिला ।
श्री चौहान के आलोचक मध्यप्रदेश में भाजपा की रिकॉर्ड जीत का श्रेय न तो लाडली बहन योजना को देना चाहते हैं , न ही शिवराज को ।
इसके बावजूद आलोचकों को यह मानना होगा कि मोदी मैजिक के साथ यदि लाड़ली बहना योजना ने अपना कमाल न दिखाया होता तो विधानसभा चुनाव के परिणाम में सबसे ज्यादा जोरदार बहुमत के साथ मध्य प्रदेश पहले नंबर पर खड़ा नहीं होता ।
जो आलोचक भाजपा की महाविजय में शिवराज के योगदान को कम समझते हैं , क्या वो लाडली बहन योजना को बंद करके भाजपा को लोकसभा चुनाव जितवा सकते हैं ?
मुख्यमंत्री शिवराज ने स्व सहायता समूह के माध्यम से भी प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का ऐसा प्रभावी अभियान चलाया है जिसने सीधा महिलाओं को ही नहीं उनके परिवारजनों को भी मजबूत किया है। ऐसे स्व सहायता समूह के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी का वोट बैंक भी मजबूत हुआ।
इन समूहों के माध्यम से महिलाओं के साथ ही उनके परिवार जनों को भी रोजगार की राह मिल गई ।
यही कारण है कि महिलाओं के मन में शिवराज के प्रति विशेष सम्मान का भाव है ।
यह सम्मान का भाव भाजपा के वोट बैंक में लगातार वृद्धि कर रहा है ।
यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश की महिलाओं से मन की बात पूछें तो पता चलेगा की लाड़ली बहनें अपने प्यारे भैया शिवराज को ही मुख्यमंत्री के पद पर लगातार देखना चाहती हैं ।
अभी हाल यह है कि मुख्यमंत्री के दावेदार नेता पार्टी हाई कमान को तरह-तरह से प्रभावित करने में लगे हुए हैं , वहीं दूसरी ओर शिवराज सिंह चौहान ने सार्वजनिक रूप से यह कहकर खुद को मुख्यमंत्री के पद की दौड़ से अलग कर लिया है कि वे मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में शामिल नहीं हैं। पार्टी उन्हें जैसा आदेश देगी वो उसके लिए काम करते रहेंगे।
यहां यह बताना जरूरी होगा कि मध्य प्रदेश के भाजपाई दिग्गजों में शिवराज सिंह चौहान ऐसा प्रभावी चेहरा बनकर सामने आए हैं जिन्होंने अपनी विनम्रता से समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है ।
लगभग 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद भी उनके कार्य और व्यवहार में घमंड की कोई झलक कहीं नहीं मिलती ।
वह एक पारिवारिक चेहरा है और मध्यप्रदेश के आम आदमी का विश्वास जीतने में सफल हुए हैं। वह भाजपा को विधानसभा चुनाव में मिली भारी जीत के बाद भी मुख्यमंत्री के पद की दौड़ में होने के बजाय जनता के बीच जाना पसंद कर रहे हैं ।
वो भी ऐसे समय जबकि विधानसभा चुनाव संपन्न हो जाने के बाद भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीते नेता जहां मंत्री और मुख्यमंत्री बनने की कोशिश में लगे हैं वहीं हारे हुए नेता दुखी होकर अपने घर बैठ गए हैं ।
ऐसे माहौल में एकमात्र शिवराज हैं जो लोकसभा चुनाव में विजय की अलख जगाने के लिए लगातार जनता से मिल रहे हैं । अलग अलग जिलों के दौरे कर रहे हैं । उनका लक्ष्य लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश से सभी 29 सीट भारी बहुमत से जीतकर केन्द्र में लगातार तीसरी बार भाजपा की सरकार बनाने का है।
( लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं, संपर्क : 9424466269 )
