इन्दौर । इन्दौर कांग्रेस में काफी जद्दोजहद और उंहापोह के बाद अंततः इन्दौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद पर युवा सुरजीत सिंह चड्ढा को मनोनीत कर दिया गया इसके पहले अरविंद बांगडी को इन्दौर शहर कांग्रेस का अध्यक्ष मनोनीत किया गया था, लेकिन इन्दौर शहर के कांग्रेसियों की फितरत के अनुसार अंदरुनी खींचतान तथा बाहरी विरोध समर्थन के चलते उसे होल्ड कर दिया था अब युवा सुरजीत के रूप में अपहोल्ड किया गया है।
अरविंद बांगडी को शोभा ओझा के खास समर्थक की वजह से शहर अध्यक्ष बनाया जा रहा था, आज मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में अध्यक्ष कमलनाथ के बाद शोभा ओझा परोक्ष रूप से दो नम्बर की हैसियत रखती हैं, इसी वजह से अरविंद बागड़ी को शहर अध्यक्ष नहीं तो प्रदेश कांग्रेस में महासचिव बना दिया गया है। हालांकि इन्दौर से विशाल गोलू अग्निहोत्री को भी प्रदेश कांग्रेस संगठन में महासचिव के रूप में शामिल किया गया है ।
युवा सुरजीत सिंह के लिए कहा जा सकता है कि शहर अध्यक्षी का ज्ञान उन्हें विरासत में मिला है उनके पिता स्व उजागर सिंह चड्ढा भी शहर कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके थे और तब ही सुरजीत राजनीति (शहर कांग्रेस की नहीं) के गुर सीखने लगे थे लेकिन उस वक्त इन्दौर कांग्रेस में इस तरहा की बेशुमार गुटबाजियां नहीं थी भोपाल से डायरेक्ट दिग्विजय सिंह का कमांड रहता था इन्दौर कांग्रेस में ये गुटबाजियां तो दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री पद के जाने के साथ आई थी तथा तब से ही लगातार बढ़ती ही जाती रही है जिसकी वजह से विगत अठारह बीस सालों में कांग्रेस शहर में इस हालत में पहुंच चुकी है कि शहर विधानसभा सीटों पर फतह करना तो दूर लड़ाई ही सम्मानीय हो । हां बीजेपी के उम्मीदवार इसका मौका खुद ही कभी कभी अपनी इस लगातार जीत के दंभ में कांग्रेस उम्मीदवार को दे देते हैं, जैसा गत चुनाव में क्षेत्र क्रमांक एक में हुआ था।
कांग्रेस प्रदेश संगठन ने युवा सुरजीत पर भरोसा जताया है और सुरजीत को भी दिग्विजय सिंह और अब जयवर्धन सिंह का समर्थक के साथ शहर में स्व. महेश जोशी गुट का माना जाता है तो सबसे बड़ी चुनौती सुरजीत के सामने विभिन्न गुटों में बटी शहर की कांग्रेस में ये मची गुटबाजियां खत्म नहीं तो मैनेज करना ही है, जोकि आगामी विधानसभा चुनाव से भी बड़ी चुनौती है, हालांकि यह भी युवा सुरजीत के लिए असंभव ही है क्योंकि इन्दौर के कई नेता स्टेट ही नहीं सेन्ट्रल लेबल तक के डायरेक्ट टच में रहते हैं जैसे पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल प्रियंका गांधी तो वर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी राहुल गांधी के तो सोनकच्छ विधायक और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा कमलनाथ के, ये तो एक तरह से घोषित तौर पर ही कुछेक नाम गिनाए गए हैं, और भी कई है।
यहां यह भी ज्ञात हो कि अभी तक के इन्दौर शहर कांग्रेस के मनोनीत अध्यक्षों में सुरजीत ही इतनी कम उम्र में इस पद पर मनोनीत हुए हैं इसलिए ही उनको यहां युवा सुरजीत कहा गया है, तो युवा सुरजीत के सामने इन्दौर के इन वयोवृद्ध, वरिष्ठ, गरिष्ठ और उम्रदराज मंझे हुए कांग्रेसियों के साथ संतुलन समन्वय जमाते आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सत्तारूढ़ बीजेपी के प्रत्याशियों के सामने संघर्ष की चुनौती पेश करना ही है क्योंकि इन्दौर शहर की पांच विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की जीतने की संभावना विगत नगर निगम और महापौर के चुनाव में साफ साफ दिखाई दे गई है। कमलनाथ चाहे कितना भी अपने सर्वे और राहुल कि भारत जोड़ो यात्रा के इम्पेक्ट बतौर प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाने का दावा कर ले लेकिन इन्दौरी मतदाताओं की फितरत उसके उलट ही है जिससे इन्दौर शहर की पांचों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की किला फतह करने की संभावना ही नहीं बनती है, बात किला लड़ाने की ही बचती है तो क्या सुरजीत उसमें भी सफल हो पाएंगे। नहीं तो सुरजीत की यह ताजपोशी नरेन्द्र सलूजा के बीजेपी में जाने से कांग्रेसी घाव पर मरहम पट्टी ही साबित होगी और कुछ नहीं।
