-ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने का अनुमान, रेपो रेट 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रह सकती है
मुंबई । भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग मंगलवार से शूरू हो रही है। 8 नवंबर को एमपीसी के फैसलों का ऐलान किया जाएगा। मई 2022 से फरवरी 2023 तक आरबीआई ने दरों में 2.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। पिछली मीटिंग जो अप्रैल में हुई थी उसमें रेपो रेट को 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया था। मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग हर दो महीने में होती है।
एसबीआर्ई का मानना है कि 6-8 जून को होने वाली आगामी बैठक में भी आरबीआई रेपो रेट को अपरिवर्तित रखेगा। एफवाय 24 के लिए महंगाई के अनुमान को भी घटाया जा सकता है। पिछली मीटिंग में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था, इकोनॉमी में जारी रिकवरी को बरकरार रखने के लिए हमने पॉलिसी रेट में बदलाव नहीं किया है, लेकिन जरूरत पडऩे पर हम स्थिति के हिसाब से कदम उठाएंगे।
लोन महंगे नहीं होंगे, ईएमवाई भी नहीं बढ़ेगी
आरबीआई के पास रेपो रेट के रूप में महंगाई से लडऩे का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो, आरबीआई रेपो रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। रेपो रेट ज्यादा होगा तो बैंकों को आरबीआई से मिलेने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आरबीआई रेपो रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को आरबीआई से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है। इस उदाहरण से समझते हैं। कोरोना काल में जब इकोनॉमिक एक्टिविटी ठप हो गई थीं तो डिमांड में कमी आई थी। ऐसे में आरबीआई ने ब्याज दरों को कम करके इकोनॉमी में मनी फ्लो को बढ़ाया था।
- आरबीआई महंगाई अनुमान घटा सकता है
आरबीआई ने एफवाय 24 के लिए अपने महंगाई अनुमान को घटा सकता है। पिछली बार भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरबीआई गवर्नर ने महंगाई के अनुमान में कटौती की जानकारी दी थी। वायसरॉय प्रॉपर्टीज के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर साइरस मोदी के मुताबिक, इकोनॉमी में सुधार के संकेत दिख रहे हैं लेकिन सेंट्रल बैंक महंगाई को काबू में रखना चाहता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आगे चलकर आरबीआई इस स्तर पर दरों को रोक देगा और कैलेंडर ईयर 2025 से दरों को कम करना शुरू कर देगा। सेंट्रल बैंक का लक्ष्य ग्रोथ रेट और महंगाई के बीच संतुलन बनाना है। हमें उम्मीद है कि एक रेगुलर मानसून ईयर महंगाई को कम करने में मदद करेगा जिससे ब्याज दरों में कमी आएगी।
