चेन्नई । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्षी दलों से 28 मई को होने वाले संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह ‘‘लोकतंत्र का मंदिर है।
सीतारमण ने कहा कि तमिलनाडु के 20 आदिनम (महंत) 28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किए गए हैं। इस अवसर पर अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के तौर पर प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को दिया गया रस्मी राजदंड ‘सेंगोल भी स्थापित किया जाएगा।
तमिलनाडु, तेलंगाना और नगालैंड के राज्यपालों के साथ यहां पत्रकारों से बात करते हुए सीतारमण ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री को ‘सेंगोल सौंपे जाने की घटना तमिलनाडु के लिए बेहद खास है। आजादी के बाद सत्ता हस्तानांतरण की प्रक्रिया के सिलसिले में नेहरू ने ‘राजाजी के नाम से लोकप्रिय पहले भारतीय गवर्नर जनरल सी आर राजगोपालाचारी से चर्चा की थी। इसके बाद राजाजी ने इस संबंध में शैव संत तिरुवदुथुरई आदिनम से चर्चा की थी, जिसके बाद उनकी सलाह पर सत्ता हस्तानांतरण के लिए ‘सेंगोल तय किया गया।
उन्होंने ‘सेंगोल को राजशाही का प्रतीक करार दिया और जोर देकर कहा कि इसका लोकतंत्र से कोई लेना-देना नहीं है। सीतारमण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की जगह प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संसद भवन का उद्घाटन का विरोध कर रहे विपक्ष को जवाब देते हुए कांग्रेस पर परोक्ष हमला किया और कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन का शिलान्यास राज्य के तत्कालीन राज्यपाल के बजाए कांग्रेस की पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी ने किया था।
उन्होंने कहा कि यह अजीब है कि जिन लोगों ने राष्ट्रपति की आलोचना की थी, वे अब अचानक उनके लिए बोल रहे हैं। कई राजनीतिक दलों द्वारा उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने को लेकर उनकी टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने जवाब दिया, ‘‘संसद लोकतंत्र का मंदिर है और इन दलों को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और समारोह में शामिल होना चाहिए।
सीतारमण ने कहा कि सेंगोल को स्थापित किया जाना भारतीय संसदीय लोकतंत्र की एक ऐतिहासिक घटना होगी। उन्होंने कहा, ‘‘राज्यसभा संसद परिसर का हिस्सा है और सेंगोल को लोकसभा में रखा जाएगा, जो लोकतंत्र के मंदिर में एक महत्वपूर्ण घटना को दर्शाता है और सेंगोल के माध्यम से सत्ता के प्रतीकात्मक हस्तांतरण से तमिलनाडु का भी संबंध है।
राजदंड पर भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की छवियों को उकेरने को सभी धर्मों के लोगों द्वारा स्वीकार किए जाने संबंधी सवाल पर सीतारमण ने कहा कि जब अंग्रेजों ने भारत छोड़ा तो देश में ईसाई और मुसलमान भी थे।
उन्होंने कहा कि लॉर्ड माउंटबेटन को दिए जाने और बाद में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपे जाने पर किसी ने उन छवियों पर आपत्ति नहीं जताई थी।
