राजे गुट के सांसद और विधायक हक्के-बक्के
जयपुर । राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के एक दिन के अनशन को लेकर राजनीतिक पंडितों के मन में कई सवाल हैं। पहला और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि क्या अब भाजपा आलाकमान आगामी राजस्थान विधानसभा चुनाव में पूर्व सीएम वसुंधराराजे को लेकर कोई बड़ा फैसला लेगा? क्या भाजपा आलाकमान अब सचिन पायलट के आरोपों के बाद राजे को सीएम उम्मीदवार या कोई अन्य महत्वूपर्ण जिम्मेदारी के साथ मैदान में उतरेगा। दरअसल पायलट ने पूर्ववर्ती वसुंधराराजे सरकार के 45 हजार करोड़ रुपए के खान घोटाले सहित अन्य मामलों में हुए भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया है। साथ ही अपनी ही गहलोत सरकार पर इन आरोपों की जांच नहीं कराने का आरोप लगा दिया है। हालांकि भाजपा नेता अपनी पूर्ववर्ती वसुंधराराजे सरकार के कार्यकाल के बचाव में उतर आए है। प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने कहा है कि राजस्थान कांग्रेस में घमासान सड़कों पर है। साथ ही गहलोत सरकार में महिलाओं पर अत्याचार, दलित शोषण, खान घोटालों और पेपरलीक घोटाले में कांग्रेसजन मौन क्यों है? पुजारी और संतों की मौत का जिम्मेदार कौन है? तुष्टिकरण के मामलों से बहुसंख्यकों की विरोधी सरकार की दुर्गति निश्चित है।
वहीं राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने पायलट के अनशन पर प्रतिक्रिया देकर कहाकि पायलट को पूर्ववर्ती भाजपा शासन पर अनर्गल आरोप लगाने की बजाय अपनी ही कांग्रेस सरकार के 4 साल 4 माह के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार के मामलों की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठानी चाहिए थी। लेकिन, दुर्भाग्य रहा कि उन्होंने अपनी सरकार के काले कारनामों पर एक शब्द भी नहीं बोल रहे हैं।
बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पद संभालने के बाद भाजपा कार्यालयों के जमीन आवंटन, साथ पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के कार्यकाल के आखिरी छह महीनों के फैसलों की जांच समेत अन्य मामलों की जांच के लिए कई कैबिनेट सब कमेटियों का गठन किया था। लेकिन, एक भी कैबिनेट सब कमेटी की जांच रिपोर्ट आज तक उजागर नहीं हुई है। इसकारण सचिन पायलट को अपनी ही सरकार के खिलाफ साढ़े चार साल चार महीने के बाद यह कदम उठाना पड़ा है।
वहीं भाजपा आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व पायलट के आरोपों पर जवाब देने के बजाए वर्तमान गहलोत सरकार में हुए भ्रष्टाचार की जांच की मांग उठा रहा है। इससे साफ है कि सचिन पायलट के आरोपों से भाजपा में भी हड़कंप है। खास तौर पर वसुंधरा राजे गुट के समर्थक सांसदों, विधायकों और भाजपा पदाधिकारी हक्के-बक्के हैं। वह समझ नहीं पा रहे है कि आखिर गहलोत सरकार के कार्यकाल आखिरी छह महीनों में यह मामला क्यों उठ रहा है। आखिर पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे पर ही क्यों आरोप लगाए जा रहे हैं।
