नई दिल्ली । हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि उन्होंने तीन युद्धों से सबक लिया है और वो भारत के साथ शांति से रहना चाहते थे। इस बयान के कुछ दिन बाद ही पाकिस्तान को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए न्यौता भेजा है। ये बैठक 4-5 मई को गोवा में होगी और भारत इसे आयोजित कर रहा है। बैठक में चीन समेत अन्य एससीओ को भी बुलाया गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी को बैठक में शामिल होने के लिए न्यौता भेजा है।
भारत वर्तमान में यूरेशियन ग्रुप की अध्यक्षता करता है। ये ग्रुप अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत जून में एससीओ शिखर सम्मेलन की भी मेजबानी करेगा जिसके लिए सरकार जल्द ही सभी सदस्य देशों के नेताओं को आमंत्रित करेगा। चीनी विदेश मंत्री किन गैंग और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव भी इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। यह इस साल भारत की उनकी दूसरी यात्रा हो सकती है क्योंकि उन्हें जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भी बुलाया जा सकता है जो 1 से 2 मार्च को होनी है।
हालांकि पाकिस्तान की तरफ से यह साफ नहीं हुआ है कि उसके विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो एससीओ बैठक के लिए भारत आएंगे या नहीं। अगर भुट्टो भारत आते हैं तो यह दोनों देशों के बीच की पहली मंत्रिस्तरीय वार्ता होगी जिसके लिए पाकिस्तानी मंत्री भारत आएंगे। इससे पहले 2015 में हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के लिए तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस्लामाबाद की यात्रा की थी। उनके साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर भी पाकिस्तान गए थे जोकि उस समय विदेश मंत्रालय के सचिव थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच गई मुद्दों को लेकर बातचीत हुई थी। इस बैठक के कुछ सप्ताह बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाहौर में तत्कालीन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर गए थे लेकिन पीएम मोदी की लाहौर यात्रा के हफ्तेभर बाद ही पठानकोट में आतंकी हमला हुआ जिस कारण दोनों देशों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता विफल रही।
