आदिवासियों का पारसनाथ जयकारा का उद्घोष
गिरडीह। सम्मेद शिखर तीर्थ क्षेत्र के पारसनाथ पहाड़ पर बड़ी संख्या में आदिवासी पहुंचे वहां पर उन्होंने पहाड़ पर चढ़कर पारसनाथ बाबा के दर्शन किए जयकारा लगाया आदिवासी और जैन समाज के बीच में बातचीत के द्वारा संबंध में बनाया गया पारसनाथ पहाड़ पर चढ़ते समय सभी आदिवासियों ने अपने जूते चप्पल नीचे उतारे और भक्ति भाव से पारसनाथ बाबा की जयकारा लगाया। जैन समाज के लोगों ने मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा और गुड़ का इंतजाम किया था सभी आदिवासी भक्तों को प्रसाद के रूप में बांटा गया जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने भी पूरे पहाड़ पर सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई मकर संक्रांति के पावन पर्व पर 50000 से अधिक आदिवासियों ने पारसनाथ पहाड़ पर जाकर मकर संक्रांति पर्व मनाया। जैन धर्म की मान्यताओं का पूरा आदर किया वही जैन समाज में भी आदिवासी श्रद्धालुओं का बढ़-चढ़कर स्वागत सत्कार किया पिछले एक माह से आदिवासियों और जैन समाज के लोगों के बीच में जो तल्खी पैदा हुई थी वह बातचीत के दौरान समन्वय में बदल गई।
मकर संक्रांति के उपलक्ष में लगभग 25 से 30000 आदिवासी भक्त पारसनाथ पहाड़ पर बाबा के दर्शन करने के लिए गए। पुलिस और प्रशासन की चौकस व्यवस्था थी। शांति सौहार्द से प्रेम से मकर संक्रांति का पर्व चलता रहा। किसी ने भी पहाड़ की दुकानों से खरीदारी नहीं की। सभी श्रद्धालु जूता चप्पल उतार कर पहाड़ पर चढ़े।
रविवार 15 जनवरी को संभवत पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए। लगभग एक लाख से ऊपर अजैन और आदिवासी समुदाय समुदाय के लोग पहाड़ पर चढ़े।
मकर संक्रांति पर हुआ चमत्कार पारसनाथ पहाड़ पर वह हो गयाजो आज के पहले कभी नहीं हुआ था। जैन समाज को भी उम्मीद नहीं थी कि इतना सब शांति से निपट जाएगा। रविवार को मधुबन पहाड़ की तलहटी में जैन समाज की सभी संस्थाएं एवं अन्य समाज की कमेटियों बंदोबस्त की कमान सामूहिक रूप से संभाली। जिनमें पंचायत प्रमुख सरपंच उप मुखिया थाना प्रभारी आदि का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
गुड और चूड़े का प्रसाद बटा
सुबह 11 बजे विमल सागर जी महाराज की समाधि के पास एक बड़ा स्टाल आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के आशीर्वाद से सबने मिलकर लगाया। 60000 से ज्यादा गुड़ चूड़ा के पैकेट बांटे गए।
सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह रही कि आदिवासी और अन्य समाज के लोग गाने बजाने का सामान लेकर पहाड़ पर नहीं गया। नीचे चेकिंग पोस्ट पर सब ने अपना सामान जमा करवा दिया था।डाक बंगले से आगे की कुछ दूरी पर अधिकांश लोंगो ने अपने जूते चप्पल उतार कर पारसनाथ टोंक पर जाकर पारस बाबा के दर्शन किए। सभी के मुख से पारस नाथ बाबा की जय प्रसन्नसागरजी के जयकारे से पहाड़ गूंज रहा था। जैन समाज की आस्था और श्रद्धा को ध्यान में रखकर आदिवासी भाइयों मकर संक्रांति का पर्व मनाया।
जैन समाज और आदिवासी भाइयों के मेलजोल से आज जो हुआ वह सम्मेद शिखर तीर्थ क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक घटना बन गई।
