भोपाल । आयुष्मान योजना में जमकर लूट हो रही है। आयुष्मान योजना में रजिस्टर्ड अस्पताल आयुष्मान योजना में फर्जी मरीजों और फर्जी बीमारियों का रिकॉर्ड बनाकर सरकार के खजाने को चूना लगा रहे हैं। मध्यप्रदेश में सैकड़ों अस्पताल आयुष्मान योजना में पंजीकृत हैं। छोटी छोटी सी बीमारियों में गंभीर बीमारी बताकर सरकार को तो लूटा ही जा रहा है। साथ-साथ मरीजों को भी भयभीत कर लूटने में यह अस्पताल कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।अब सरकार ने इन पर लगाम लगाने के लिए तैयारी की है। कुछ ऐसे नियम लागू किए जा रहे हैं। जिनसे आयुष्मान योजना में हो रही लूट को रोका जा सके।
-120 अस्पतालों में 200 करोड़ का घोटाला?
आयुष्मान योजना में मध्यप्रदेश के 620 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। पिछले 3 सालों में इनको 1048 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ है।जांच में 120 निजी अस्पतालों में 200 करोड़ रुपए के घोटाला उजागर हुआ। उस पर सरकार ने चुप्पी साध ली।अब नियमों को बदलने की बात कर रही है।
– नए नियम
मध्य प्रदेश सरकार अब आयुष्मान योजना में घोटाले को रोकने के लिए मरीज की केस शीट में डॉक्टर की सील और साइन को अनिवार्य कर रही है। जो मरीज भर्ती हुए हैं उनके मोबाइल फोन पर बात करके पुष्टि करने का काम भी सरकार ने शुरू कर दिया है।योजना के तहत अस्पताल में कौन कौन से डिपार्टमेंट संचालित हो रहे हैं। यह बताना अस्पतालों के लिए आवश्यक किया गया है। जिन जिन डॉक्टरों ने इलाज किया है। उनके हस्ताक्षर अनिवार्य किए जा रहे हैं।
मरीजों का बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगवाना अनिवार्य किया जा रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीज का फोटो और बिस्तर पर मॉनिटर के साथ रोजाना मरीज की फोटो अनिवार्य की जा रही है। जिन मरीजों का ऑपरेशन होगाउनकी ओटी टेबल की फोटो और ऑपरेशन के बाद टांके के फोटो खींचकर पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। मेडिसन विभाग में मरीज का जो उपचार किया गया है।उसकी डिटेल प्रतिदिन पोर्टल पर एकत्रित की जा रही हैं। आईसीयू के मरीजों के ऊपर विशेष निगाह रखी जाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सरकार को लगता है कि इससे आयुष्मान योजना में जो भ्रष्टाचार हो रहे हैं। उसको रोका जा सकेगा।
