नई दिल्ली । चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनाती के लिए 2020 में सौंपी गई आपातकालीन शक्तियों के तहत खरीदा गया इजराइली हेरॉन टीपी ड्रोन सेना को साल की शुरुआत में ही मिल चुका था। रक्षा सूत्रों के अनुसार, चार नए हेरॉन टीपी ड्रोन में से दो की डिलीवरी मार्च में हो गई थी, जिसे चीन के साथ सैन्य गतिरोध के बीच निगरानी और टोही मिशन के लिए पूर्वी लद्दाख में तैनात किया गया था। सूत्रों ने कहा कि अन्य दो ड्रोनों की डिलीवरी मिलने पर उन्हें पूर्वोत्तर में एलएसी के साथ तैनात किया जाएगा।
दरअसल भारत ने चार मध्यम ऊंचाई वाले लॉन्ग ऐनडूरेंस ड्रोन खरीदने के सौदे को अंतिम रूप दे दिया है। रक्षा सूत्रों ने कहा था कि लंबे समय तक निगरानी और टोही मिशन के लिए एडवांस उपग्रह संचार और सेंसर के साथ मेल ड्रोन को अपग्रेड करने की भी योजना है। वहीं प्रोजेक्ट चीता नामक एक नई परियोजना के तहत उन्हें सटीक हमलों के लिए हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों और लेजर-निर्देशित हथियारों से लैस किया जाएगा। भारत अमेरिका से 30 एमक्यू-9वी हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस सशस्त्र ड्रोन खरीदने की भी योजना बना रहा है। कुल 3 बिलियन डॉलर देकर तीनों सेनाओं के लिए दस ड्रोन लिए जाएंगे। हालांकि अभी तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
एडवांस मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) की एक श्रृंखला की खरीद पर पिछले दो वर्षों में तीनों सेनाओं का फोकस रहा है। नौसेना 40 नौसैनिक जहाज के लिए यूएवी खरीदने की प्रक्रिया में है, इसके लिए नौसेना ने इस साल की शुरुआत में एक अधिसूचना जारी की थी। नौसेना ने 2020 में, फास्ट ट्रैक रूट के माध्यम से 10 नौसैनिक यूएवी खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी। साथ ही 2020 में अमेरिका से लीज पर दो प्रीडेटर ड्रोन भी लिए थे। वहीं एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने बताया कि भारतीय वायु सेना यूएवी, काउंटर-यूएवी की एक श्रृंखला की खरीद और यूएवी के अपने मौजूदा बेड़े को हथियारबंद बनाने की प्रक्रिया में है।
थल सेना भी निगरानी और लक्ष्य प्राप्ति के उद्देश्यों के लिए अलग-अलग श्रेणियों के साथ विशिष्ट मात्रा में यूएवी भी खरीद रही है, जिसमें लड़ाकू भूमिकाओं और ड्रोन-विरोधी प्रणालियों के लिए युद्ध सामग्री शामिल है। पिछले साल, सेना ने 100 से अधिक विस्फोटक ले जाने वाले ड्रोन ‘स्काईस्ट्राइकर’ की खरीद के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। जिसे इजराइल के एल्बिट सिस्टम और भारत के अल्फा डिजाइन के बीच बेंगलुरु स्थित संयुक्त उद्यम द्वारा निर्मित किया जाएगा।
