“मीडिया चिंतन”
11 अक्टूबर को करोड़ों की लागत से बने महाकाल लोक का प्रधानमंत्री के द्वारा लोकार्पित किया जाना है ,इस कार्यक्रम के प्रचार प्रसार के लिए उज्जैन की मीडिया को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आग्रह किया जा रहा है और उज्जैन की मीडिया इस आग्रह को शिरोधार्य करते हुए अपने कर्तव्य के निर्वहन के लिए पूरे शिद्दत के साथ शासन प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है,लेकिन उज्जैन की मीडिया को “भोजन” कराकर सिर्फ दूर से ही भाटगीरी से करने की इजाजत है,प्रधानमंत्री जी की फोटो विडियो देखने का सौभाग्य उज्जैन की मीडिया को जनसंपर्क के माध्यम से ही होगा ,खबर लिखने की भी कोई आवश्यकता नहीं वह भी जनसंपर्क द्वारा सीधे मीडिया को प्रेस नोट के माध्यम से भेज दिया जाएगा ,उज्जैन की मीडिया को सिर्फ कॉपी पेस्ट करना रहेगा, फोटो वीडियो और समुचित खबर बनाने की जिम्मेदारी उज्जैन से बाहर की मीडिया की रहेगी , ग्रामीण क्षेत्र और महानगर के लोगों में जो फर्क होता है, सिर्फ यही फर्क उज्जैन और बाहर की मीडिया में है ।
कहा जाता है मीडिया लोकतंत्र का आइना कहा जाता है, लेकिन प्रधानमंत्री जी के इस कार्यक्रम के दौरान उज्जैन की मीडिया से लोकतंत्र का आईना छीन लिया जाएगा ,उन्हें अपने-अपने घर में अपने अपने मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से फोटो वीडियो और सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि सुलभता से वह अपनी पत्रकारिता घर बैठे कर सकें।
उज्जैन के पत्रकारिता जगत को शासन प्रशासन द्वारा किए जा रहे इस अभूतपूर्व व्यवहार के लिए चिंतन करने की आवश्यकता है, क्योंकि उज्जैन की मीडिया के लिए शासन प्रशासन का यह व्यवहार नया नहीं महामहिम राष्ट्रपति महोदय के उज्जैन आगमन के दौरान भी इसी प्रकार का परिदृश्य था, महामहिम राष्ट्रपति के भोपाल दौरे पर वहां की मीडिया ससम्मान राष्ट्रपति जी का कवरेज एवं उनसे रूबरू होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।
मनोज उपाध्याय
पत्रकार
