मुंबई । भारत का विदेशी मुद्रा संकट हर माह बढ़ता ही जा रहा है। आयात और निर्यात में असंतुलन होने के कारण विदेशी मुद्रा का संकट चल ही रहा था। इसी बीच करोड़पतियों ने भी विदेशी मुद्रा के संकट को बढ़ाने के लिए आग में घी डालने जैसा काम कर रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक की उदारीकृत धन प्रेषण योजना के तहत वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विदेशों में धन भेजने की रफ्तार 65 फ़ीसदी बढ़ गई है। पिछले वर्ष की पहली तिमाही में 3.67 अरब डॉलर की तुलना में इस वर्ष 6.4 डालर से ऊपर विदेशी मुद्रा भेजी गई है।
रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय यात्राओं का खर्च 2.92 अरब डालर से बढ़कर इस वर्ष की तिमाही में 6.4 अरब डालर हो गया है। निकट संबंधियों के खर्च के लिए भारत से भेजी गई विदेशी मुद्रा का क्रम दूसरा है। इसी तरह भारतीय करोड़पति उपहार के रूप में बड़ी मात्रा में डालर विदेशों में भेज रहे हैं। इसी तरह विदेशों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा का खर्च भी पिछले साल की तुलना में लगभग 2 गुना हो चुका है।
कोरोना संक्रमण के दौरान विदेशी मुद्रा भारत में कम खर्च हो रही थी। जैसे ही कोरोना का संक्रमण कम हुआ है। उसके बाद भारत का विदेशी मुद्रा का भंडार बड़ी तेजी के साथ खाली होना शुरू हो गया है।
रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा की निकासी को कम करने की दिशा में विचार कर रहा है। संभवतः जल्द ही केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय यात्राओं, उपहार और खर्च के लिए रकम घटाने की दिशा पर विचार करेगी। ताकि विदेशी मुद्रा का भंडार बेहतर स्थिति में बना रहे।
