सावन के पहले सोमवार को काशी विश्वनाथ मंदिर में यदुवंशी समाज के लोग धरने पर बैठ गए। करीब डेढ़ घंटे धरना देने के बाद उन्हें गर्भगृह में जाने की इजाजत मिली। यदुवंशी समाज ने प्रशासन पर कई आरोप लगाए हैं।
सावन के पहले सोमवार को काशी के यदुवंशी समाज और जिला प्रशासन के बीच काशी विश्वनाथ मंंदिर के गर्भगृह में जाने को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद करीब एक-डेढ़ घंटे तक यदुवंशी समाज के लोगों ने को काशी विश्वनाथ मंदिर में धरना दिया।
मिली जानकारी के अनुसार सावन के पहले सोमवार पर परंपरागत ढंग से जलाभिषेक यात्रा लेकर जब काशी के यदुवंशी समाज के लोग पांचवें पड़ाव काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे तो उन्हें गर्भगृह में जाने से रोक दिया गया। उधर, यदुवंशी समाज के लोगों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन के बीच कई चरणों की हुई बातचीत में यह तय हुआ था कि परंपरा अनुसार यदुवंशी गर्भगृह में जाकर अभिषेक करेंगे।
लेकिन जब यदुवंशी समाज के लोग काशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंचे तो सभी को बाहर से जल चढ़ाने के लिए बाध्य किया गया। इससे नाराज होकर यदुवंशी समाज के लोग मंदिर में ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान अव्यवस्था की स्थिति से बचने के लिए मंदिर के अंदर मौजूद पुलिस ने सख्ती करने की कोशिश की तो मंदिर के बाहर भी काफी संख्या में यदुवंशी मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए धरने पर बैठ गए।
मजबूर होकर जिला प्रशासन को पांच यदुवंशियों को गर्भगृह में ले जाना पड़ा। चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष लालजी यादव ने बताया कि कई चरणों की बातचीत के बाद जिला प्रशासन ने हमारी सभी बातों को मान लिया था। हमें विश्वास में लेने के बाद हमारे साथ विश्वासघात किया गया है। ऐन मौके पर यदुवंशियों को गर्भगृह में जाने से रोकना किसी भी दृष्टि से तर्कसंगत नहीं है। फिलहाल तो यात्रा हम आगे ले जा रहे हैं लेकिन इस मुद्दे को हम यहीं छोड़ने वाले नहीं हैं।
