देवास(माधव एक्सप्रेस) कोरोना महामारी का तो प्रकोप लगभग खत्म हो गया है लेकिन वर्तमान में डॉक्टरों की मनमानी कायम है। आम लोगों के साथ चिकित्सा के क्षेत्र में भारी लूट का खेल खेला जा रहा है, कारण शहर में अधिकतर चिकित्सकों ने अपने खुद के क्लीनिक और खुद का मेडिकल खोल रखा है इसके कारण मरीज जब उपचार कराने जाता है तो मजबूरी में उनके ही मेडिकल से दवा लेनी पड़ती है। जबकि शहर में मेडिकल की कमी नहीं है ।लेकिन इसके बावजूद भी हॉस्पिटलों में अपना खुद का मेडिकल बिजनेस चल रहा है।
रात में भी खोलना चाहिए मेडिकल
स्थानीय जिला प्रशासन को एवं स्वास्थ्य विभाग को इस ओर ध्यान देना होगा की रात्रि कालीन में शहर में एक भी मेडिकल खुला नहीं होता है इस कारण आम नागरिक अगर रात्रि कालीन अस्वस्थ हो जाता है। और उसको मेडिसन की जरूरत पड़ती है तो एक भी मेडिकल नहीं खुला होता है इसके कारण मजबूरी मरीज फिर सुबह होने का इंतजार करना पड़ता शासन को नियम बनाना चाहिए कि रात्रि कालीन भी मेडिकल खुले रहें।
इसका उदाहरण वर्तमान में इंदौर रोड पर देखा जा सकता है कि कोरोना के बाद एक डॉक्टर ने इंदौर एबी रोड पर अपना खुद का हॉस्पिटल खोल रहा है जिसकी तैयारी चल रही हे।
पैथोलॉजी की हो जांच
शहर में पैथोलॉजी संचालकों की मनमानी चल रही है और पैथोलॉजी हर जांच के अलग-अलग रेट है स्वास्थ्य विभाग को ईश्वर भी ध्यान देना चाहिए जहां तक की एमजीएच में भी जाने वाले मरीजों को निधि पैथोलॉजी में सोनोग्राफी कराने बोला जाता है।इनकी भी जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए
फर्जी डिग्रीधारी डाक्टर कर रहे हैं उपचार
शहर में कोरोनाकाल के समय से शहर में झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या बढ़ गई है गली-गली में किल्ली न खुली नजर आती है के स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों को यह नहीं दिख रहा है की डिग्री की जांच की जाए ।
इस संबंध में जब सीएमएचओ डां एमपी शर्मा से बात करना चाही तो उन्होंने फोन नहीं उठाया
