अनूपपुर। माधव एक्सप्रेस,देश में किन्नर अखाड़ा, वाल्मीकि अखाड़ा एवं अन्य सामाजिक अखाड़ों के गठन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के महामंडलेश्वर एवं अखाड़ा परिषद के संपर्क प्रमुख/राष्ट्रीय मीडिया संयोजक श्री श्री 1008 पूर्ण गुरु करौली शंकर दास जी महाराज ने कहा कि परिषद में 14वें अखाड़े का प्रवेश किसी भी स्थिति में संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के तहत किसी भी समाज या वर्ग को अपना संगठन, परिषद, संस्था या अखाड़ा बनाने का पूरा अधिकार है, लेकिन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ऐतिहासिक और प्राचीन परंपरा में केवल 13 अखाड़े ही मान्य हैं। इनकी संख्या में कोई परिवर्तन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
महाराज श्री ने स्पष्ट किया कि किन्नर अखाड़ा, वाल्मीकि अखाड़ा या अन्य किसी भी संगठन के गठन पर परिषद को कोई आपत्ति नहीं है। ऐसे संगठनों को अखाड़ों का संरक्षण मिल सकता है, लेकिन परिषद के मूल ढांचे में 14वें अखाड़े को स्थान नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम इस महान सनातन परंपरा को न बिखरने देंगे और न टूटने देंगे। इसके लिए सभी 13 अखाड़े पूरी तरह एकजुट हैं।”
उन्होंने कहा कि महाकुंभ, अर्धकुंभ एवं उत्तराखंड में आयोजित होने वाले कुंभ मेलों में अमृत स्नान, पेशवाई और अखाड़ों का क्रम सदियों पुरानी परंपराओं तथा आपसी सहमति पर आधारित है। यह व्यवस्था शासन-प्रशासन के अभिलेखों में भी दर्ज है, इसलिए इसमें किसी नए बदलाव या भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं है।
महामंडलेश्वर करौली शंकर दास जी महाराज ने कहा कि यदि भविष्य में किसी विषय पर विचार-विमर्श की आवश्यकता होती है, तो वह केवल 13 पारंपरिक अखाड़ों की सर्वसम्मति से ही संभव होगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का गठन भी इन्हीं 13 अखाड़ों के आधार पर महापुरुषों द्वारा किया गया था और यह व्यवस्था यथावत बनी रहेगी।
उन्होंने संत समाज से भी अपील की कि भ्रम की स्थिति पैदा करने वाले बयान देने से बचें तथा मर्यादा और संयम का पालन करें। उन्होंने कहा कि सभी संत पूजनीय हैं, लेकिन सनातन परंपराओं की मर्यादा बनाए रखना सर्वोच्च दायित्व है।