मैहर। माधव एक्सप्रेस मैहर नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती गीता संतोष सोनी ने हाल ही में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंच से की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने भाषा और गरिमा के मानदंड रेखांकित करते हुए कहा कि सार्वजनिक मंचों का उपयोग महिला सशक्तीकरण के नाम पर निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्वाभिमान को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
“संवैधानिक अधिकारों का स्वतंत्र प्रयोग करती हूँ”
श्रीमती सोनी ने जारी बयान में स्पष्ट किया कि वे जनता द्वारा चुनी गई नगर पालिका अध्यक्ष हैं और अपने सभी संवैधानिक व वैधानिक दायित्वों का निर्वहन पूरी स्वतंत्रता के साथ करती हैं। उन्होंने अपने पति (जो सांसद प्रतिनिधि भी हैं) के हस्तक्षेप के आरोपों का खंडन करते हुए कहा, “मेरे पति ने कभी भी मेरे अधिकारों या निकाय के प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया है। सार्वजनिक मंच से उनके नाम का सहारा लेकर की गई टिप्पणी अप्रत्यक्ष रूप से मेरी कार्यक्षमता पर सवाल उठाती है, जो मुझे व्यक्तिगत रूप से व्यथित करने वाली है।”
“आमंत्रण न देना और सशक्तीकरण की बात करना विरोधाभासी”
कार्यक्रम की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण सार्वजनिक आयोजन में मैहर की प्रथम नागरिक होने के बावजूद उन्हें औपचारिक रूप से आमंत्रित तक नहीं किया गया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “यदि वास्तव में महिलाओं के सम्मान और सशक्तीकरण की मंशा होती, तो निर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष को मंच पर सम्मानपूर्वक स्थान दिया जाता। एक तरफ महिला जनप्रतिनिधि को उपेक्षित करना और दूसरी तरफ उसी मंच से महिलाओं को आगे लाने की बातें करना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।”
विवाद नहीं, सत्य सामने रखना उद्देश्य
श्रीमती गीता संतोष सोनी ने कहा कि वे सभी वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों का पूर्ण सम्मान करती हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में सभी से यह अपेक्षा भी रखती हैं कि वे लोकतांत्रिक मर्यादाओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों के पद की गरिमा का ख्याल रखें। उन्होंने अंत में स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का राजनीतिक विवाद उत्पन्न करना नहीं, बल्कि जनता के समक्ष सत्य और सही तथ्यों को प्रस्तुत करना है।