युद्ध जब आगे बढ़ता है, तो अपने साथ विनाश की नवीन इबारत भी लिखता चला जाता है, युद्धरत मॉनव घातक बारूदी हथियारो से अपने ही द्वारा निर्मित प्रगति के नवनिर्माणो को धराशाही करता हुआ आगे बढ़ता जाता है। बारूद का अपना चरित्र है। बारूद तबाही ओर बर्बादी लाती है। यह निर्माण के विरुद्ध है, दुनियाँ में जब भी बारूद का बहुतायत में प्रयोग हुआ है, विध्वंस का नया इतिहास लिखा गया। बारूद इंसानी भावनाओं को नहीं जानती। प्रेम, अहिंसा, करुणा ,दया जैसे शब्द बारूद के शब्दकोष में शायद है ही नहीं। किन्तु यह भी सच है कि इन बारूदी हथियारों का संचालक भी इंसान ही होता है। युद्ध के मैदान में बारूदी हथियारो का संचालन करतें-करतें इंसान भी बारूदी चरित्र में ढल जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध मे बारूदी ताकत से मॉनव निर्मित प्रगति के धराशाही होते दृश्य दिल दहला रहें है। युद्ध से समस्याओं का हल ढूढ़ने की सोच मॉनव के हित मे कभी नहीं हो सकती है। युद्ध मॉनव के प्रगति की ओर बढ़ते कदमों की सबसे बड़ी रुकावट है। युद्ध का परिणाम सदैव विनाश, विध्वंस ओर तबाही ही रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध विश्व युद्ध की दिशा में बढ़ रहा है। इस युद्ध के परिणाम सिर्फ इन दो देशों को नहीं अपितु सारी दुनियाँ को भुगतने पड़ सकतें है। बंदूक, तोप, टैंक, मिसाइल ओर परमाणु बम यह बर्बादी के साधन है। इनसे निकली बारूदी आग प्रगति की ऊंची इमारतों को तो जलाकर राख करती ही है। यह जल, जंगल, जमीन, हवा, पानी और हमारे पर्यावरण को भी विषैला बना देती है। इंसानों को गूंगा, बहरा, अंधा ओर विकलांग भी बनाती है। बारूद को पसंद करने वाले इंसानी भावनाओं के हितैषी कभी नहीं हो सकतें है। जीवन ईश्वर की नायाब रचना है और बारूद इंसानी फितरत का विनाशक अविष्कार। बारूद का प्रयोग ईश्वरीय रचनाओं को नष्ट कर रहा है। इस क्रम को रोकना होगा। इसकी सबसे अहम जवाबदेही दुनिया मे शांति की पताका थामें भारत राष्ट्र को ही करनी होगी। यह इंसानी दुनियाँ के लिए बेहद विचारणीय प्रश्न है कि जिन देशों ने सबसे ज्यादा बारूदी अविष्कार किये, हथियारो को संग्रहित किया है, दुनियाँ को युद्ध की विभीषिका में झोंक दिया उन्हें महाशक्ति का तमगा थमा दिया गया। यह वर्तमान दुनियाँ की सच्चाई है कि हथियारों को संग्रहित करने वाले देश महाशक्ति बने हुए है। जिन महाशक्ति शाली देशों को मॉनव के जीवन को सरल, सुगम सुविधायुक्त बनाने का मानवीय एवं विश्व हितैषी कार्य करना चाहिए वह बारूदी विनाश का संग्रहण कर दुनियाँ को डराने का काम कर रहे है। वें राष्ट्र दुनियाँ में हथियारो के सौदागर बन गए है। हथियार बहादुरों का श्रृंगार जरूर है, किंतु जब वह मॉनव हित में इस्तेमाल किये जाए। दुनियाँ अभी कोरोना की विभीषिका से उभर ही नही पाई थी की विश्व के सामने युद्ध का संकट मुँह बाए खड़ा हो गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध सावधानी ओर शांति के प्रयासों के अभाव में कब विश्व में बदल जाएगा यह कहा नहीं जा सकता है। कब परमाणु बमों के विस्फोट की धमकियां सच साबित हो जाए ओर दुनियाँ दहल जाए यह भी कहा नही जा सकता है। तृतीय विश्व युद्ध की कल्पना कर आम आदमी भयभीत है। घातक हथियारों के प्रयोगों की धमकियां दुनियाँ के आम इंसानों को डरा रहीं है। इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध तृतीय विश्व युद्ध मे बदले इसे रोकने की जवाबदेही सारी दुनियाँ के लोगो की है। उन महाशक्तिशाली देशों की अधिक है, जिन्हें दुनियाँ ने महाशक्ति के तमगे से शुशोभित कर रखा है। शक्तियां जब तक निर्माण की पक्षधर है सराहनीय ओर प्रशंसनीय है। शक्तियों का प्रयोग आमजनता के खिलाफ करने वाली महाशक्तियों को यह जान लेना चाहिए कि उन्हें आमजनता के साथ किये अपराध की सजा जरूर मिलेगी। यह सजा देने वाले उस राष्ट्र का आमजनमानस होगा। युद्ध को आम जनता ने कभी पसंद नहीं किया है। यह शासकों की गलत नीतियों और दुनियाँ पर राज करने की मंशा का परिणाम भर रहा है। घातक हथियारों का रूसी प्रदर्शन बातचीत ओर चर्चाओं के दौर के खात्मे का एलान है। आपसी संवाद की कोशिशों को बरकरार रखना मॉनव हित मे बहुत आवश्यक है। रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने और शांति स्थापित करने के प्रयासों की गति में तेजी की आवश्यकता है। भारत ने नाटो के मंच पर तटस्थता का रुख जरूर अपनाया हैं। यह भारत की कूटनीति का हिस्सा भी हो सकता है। किन्तु विश्व शांति का निर्माण भारत की प्राथमिकता होना चाहिए। भारत के विश्व चर्चित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका भी विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी दुनियाँ लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। भारत को यह बताना होगा कि नाटो में तटस्थता की नीति शांति स्थापना की दिशा में भारत के कदमों का बढ़ना है। दुनियाँ में यह सदेश जाना चाहिए कि भारत हर बार की तरह दुनियाँ में शांति के प्रयासों को करने में अहम भूमिका निभा रहा हैं। दुनियाँ पर मंडरा रहे विश्व युद्ध के संकटों को खत्म करतें हुए दुनियाँ की आम आवाम को घातक हथियारों के प्रयोगों के निर्मित भय से मुक्ति दिलाने के अपने प्रयास करता रहेगा। शायद दुनियाँ में शांति स्थापित कर मानवीय प्रगति की गति में आ रहीं रुकावटों को दूर करना ही महाशक्ति बने राष्ट्र का महत्वपूर्ण दायित्व है। शांति के प्रयोगों को गति देकर भारत दुनियाँ की आम जनता के मन मे अपनी सम्मानजनक जगह बना सकता है। विश्व शांति के इन प्रयासों को मूर्त रूप देकर एक ओर भारत दुनियाँ में मानवता का असली पैरोकार बन जाएगा। विश्व में शांति की स्थापना कर भारत दुनियाँ की असली महाशक्ति भी बन सकता है। शायद सारी दुनियाँ को भारत से यहीं अपेक्षा भी है। समय के संकेत भारत के महाशक्ति बनने की ओर इशारा कर रहें है। विश्व शांति के प्रयासों को करने में भारत को अधिक तत्परता दिखाने की आवश्यकता है। युद्ध की विध्वंसकारी मानसिकता को शांति की निर्माणकारी सोच से ही पराजित किया जा सकता है। शांति सभ्य ओर विकासशील दुनियाँ की पहली जरूरत हैं।
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नरेंद्र तिवारी ‘पत्रकार’
मोतीबाग सेंधवा जिला बड़वानी मप्र
मोबा-9425089251
