सारंगपुर।माधव एक्सप्रेस /देश की सीमाओं की रक्षा में मुस्तैद भारतीय सेना के जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए सारंगपुर की पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रूपल प्रमोद सादानी एक अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। रूपल सादानी पिछले 12 वर्षों से लगातार रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अपने हाथों से राखियां तैयार करती हैं। इस वर्ष भी उन्होंने यह सिलसिला जारी रखते हुए सैनिकों के लिए विशेष रक्षा सूत्र तैयार किए हैं।
रक्षा मंत्रालय के माध्यम से भेजी जाती हैं राखियां
हाथों से बनाई गई इन राखियों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से सीधे रक्षा मंत्रालय के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय भेजा जाता है। वहां से मंत्रालय द्वारा देश की विभिन्न सीमाओं पर तैनात सैनिक भाइयों तक यह राखियां, कुमकुम और अक्षत के साथ पहुंचाई जाती हैं। प्रत्येक सीमा क्षेत्र में मुख्य चौकियों के माध्यम से 25-25 राखियां वितरित की जाती हैं, ताकि कठिन और विपरीत मौसम में देश की रक्षा करने वाले जवानों की कलाई सूनी न रहे और उन्हें अहसास हो कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
पूर्व में वेतन भी कर चुकी हैं दान
रूपल सादानी का देश के सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति गहरा समर्पण रहा है। अपने नगरपालिका अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपने 17 महीनों का पूरा वेतन (कुल 81 हजार 600 रुपये) सैनिक परिवार कल्याण कोष में दान कर दिया था। इस राशि का उपयोग सैनिक परिवारों की आर्थिक सहायता के लिए किया गया था।
सैनिकों का मनोबल बढ़ाना मुख्य उद्देश्य
पूर्व नपाध्यक्ष का मानना है कि सैनिक हमारे असली नायक हैं। जब नागरिक अपने घरों में सुरक्षित त्योहार मनाते हैं, तब वे सीमाओं पर पहरा दे रहे होते हैं। ऐसे में एक नागरिक के तौर पर उनके सम्मान में योगदान देना सभी का कर्तव्य है। उनके द्वारा स्वयं तैयार की गई ये राखियां केवल एक धागा नहीं, बल्कि देशवासियों का स्नेह और सम्मान हैं, जो सरहद पर तैनात वीर जवानों का हौसला बढ़ाती हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी इस राष्ट्रभक्ति पूर्ण कार्य की सराहना
की है।
