कलेक्टर ने ‘दैनिक माधव एक्सप्रेस’ के समाचार पर लिया संज्ञान; 7 दिनों में मांगी रिपोर्ट
नलखेड़ा। विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर परिसर में एक निजी संस्था द्वारा कथित तौर पर नियम विरुद्ध दान और सोने-चांदी के आभूषण संग्रहण करने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। ‘दैनिक माधव एक्सप्रेस’ में इस विषय पर समाचार प्रकाशित होने के बाद, कलेक्टर प्रीति यादव ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय संयुक्त जांच दल का गठन कर दिया है।
आधिकारिक आदेश के अनुसार, जांच समिति को 7 कार्यदिवसों के भीतर मंदिर परिसर का भौतिक निरीक्षण कर दान-संग्रहण व्यवस्था, नगद एवं स्वर्ण-रजत के संपूर्ण लेखा-जोखा और अन्य शिकायतों के संबंध में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सुझावों सहित प्रस्तुत करनी होगी।
उच्च स्तरीय जांच दल में यह अधिकारी शामिल:
अध्यक्ष: श्री बी.एस. सोलंकी (मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत)
सदस्य: श्री मनीष सोलंकी (जिला कोषालय अधिकारी)
सदस्य: सुश्री मिनी अग्रवाल (मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नलखेड़ा)
क्या है पूरा मामला?
शासकीय नियमों के अनुसार, मां बगलामुखी मंदिर पूरी तरह से शासन के नियंत्रण में है और इसकी सभी व्यवस्थाओं के संचालन के लिए एक आधिकारिक प्रबंध समिति गठित है, जिसके पदेन अध्यक्ष स्थानीय एसडीएम होते हैं। नियमों के मुताबिक, आधिकारिक समिति के अतिरिक्त किसी भी अन्य निजी संस्था द्वारा मंदिर परिसर के भीतर सीधे तौर पर दान या आभूषण स्वीकार करना प्रतिबंधित है।
शिकायत और प्राप्त साक्ष्यों के अनुसार, ‘नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति’ नामक एक गैर-सरकारी संस्था द्वारा मंदिर परिसर में ‘रजत सौंदर्यीकरण हेतु दान पत्र’ के नाम पर रसीदें काटी जा रही थीं। इन रसीदों पर एक बैंक खाता संख्या और निजी मोबाइल नंबर भी अंकित पाए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं द्वारा दिए जा रहे दान के सीधे सरकारी खजाने में न जाने और वित्तीय नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई गई है।
पूर्व कार्यकाल की व्यवस्थाओं पर भी होगी जांच
बताया जा रहा है कि यह समानांतर व्यवस्था वर्ष 2024 में तत्कालीन स्थानीय प्रशासन के कार्यकाल के दौरान शुरू हुई थी, जो कि बिना किसी वैधानिक अनुमति के लगातार संचालित हो रही थी। इस अवधि के दौरान एकत्र किए गए लाखों रुपए के नगद व सोने-चांदी के आभूषणों के ऑडिट और लेखा-जोखा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। आधिकारिक प्रबंध समिति के संज्ञान में लाए बिना इतनी बड़ी राशि और संपत्तियों के संग्रहण ने पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अपंजीकृत व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच संभव
प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार, इस समानांतर व्यवस्था और संग्रहण कार्य में कुछ ऐसे व्यक्तियों की संलिप्तता भी सामने आई है, जो मंदिर की आधिकारिक व्यवस्था या अधिकृत पुजारी पैनल में पंजीकृत नहीं हैं। प्रशासनिक जांच दल अब इस बात का भी पता लगाएगा कि इन अपंजीकृत व्यक्तियों को मंदिर के संवेदनशील क्षेत्रों में गतिविधियों के संचालन की अनुमति किस स्तर पर और क्यों दी गई थी।
प्रशासनिक रुख: जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की साख, पारदर्शिता और श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है। जांच दल की रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
