चंदेरी । ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी चंदेरी में सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों ने चिंता व्यक्त की है। एक ओर जहां नगर के विकास पर बड़ी राशि खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील और मूलभूत स्थल (मरघट शाला) की कथित बदहाली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
सीमित मरम्मत और पारदर्शिता की मांग
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, हाल ही में मरघट शाला के टीन शेड पर कुछ मरम्मत कार्य किया गया था, जिसमें केवल कुछ टीन की चादरें बदली गईं। इस कार्य के बाद अब स्थानीय स्तर पर इसके वित्तीय विवरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। नागरिकों का सवाल है कि इस कार्य के लिए नगरपालिका से कितनी राशि स्वीकृत की गई थी और वास्तव में कितना खर्च हुआ। यदि कार्य सीमित स्तर पर था, तो उसके एवज में कितना भुगतान किया गया, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सार्वजनिक धन के उपयोग पर उठते सवाल
नागरिकों ने नगर विकास के लिए प्रतिवर्ष आने वाले बजट के सही आवंटन और उपयोग पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि विकास कार्य सुचारू रूप से हो रहे हैं, तो मरघट शाला जैसी आवश्यक सार्वजनिक सुविधा अब तक उपेक्षित क्यों है?
दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग
स्थानीय निवासियों ने जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मरघट शाला में हुए हालिया निर्माण कार्य से जुड़े सभी तकनीकी और वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। नागरिकों के अनुसार, निम्नलिखित विवरण सामने आने से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी:
कार्य के लिए स्वीकृत कुल राशि और प्राक्कलन (Estimate)
ठेकेदार या एजेंसी का नाम
माप-पुस्तिका (Measurement Book – MB) का विवरण
कार्य के बदले किया गया वास्तविक भुगतान
पर्यटन और अपनी समृद्ध विरासत के लिए प्रसिद्ध चंदेरी में इस संवेदनशील स्थल की स्थिति को लेकर नागरिकों में असंतोष है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इन तकनीकी और वित्तीय सवालों पर क्या रुख अपनाता है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।
