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उज्जैन, माधव एक्सप्रेस,30 जून 2026: स्नैक्स और पेय पदार्थ निर्माता कंपनी पेप्सिको इंडिया ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में अपनी अत्याधुनिक फ्लेवर निर्माण इकाई की शुरुआत की है। 1,266 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित यह संयंत्र मध्य भारत में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और सहायक उद्योगों के विस्तार को गति देगा। यह भारत में कंपनी की दूसरी और वैश्विक स्तर पर नौवीं फ्लेवर निर्माण इकाई है।
इस इकाई का वर्चुअल उद्घाटन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पेप्सिको के इंटरनेशनल बेवरेजेज सीईओ यूजीन विलेम्सेन, पेप्सिको इंडिया एवं दक्षिण एशिया के सीईओ जागृत कोटेचा और पेप्सिको ग्लोबल कंसन्ट्रेट सॉल्यूशंस के जीएम व एसवीपी इवन नॉर्टन की उपस्थिति में किया गया।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
बड़ा निवेश: यह संयंत्र वर्ष 2030 तक भारत में पेप्सिको की ₹5,700 करोड़ की कुल निवेश प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
उत्पादन क्षमता: 22 एकड़ में फैली इस इकाई में पेप्सिको के प्रमुख पेय पोर्टफोलियो के लिए बेवरेज कंसन्ट्रेट (फ्लेवर) का निर्माण किया जाएगा।
रोजगार सृजन: इस संयंत्र के माध्यम से क्षेत्र में लगभग 500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
MSME को बढ़ावा: स्थानीय विनिर्माण बढ़ने से राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और सहायक उद्योगों को विकास के नए अवसर मिलेंगे।
आर्थिक और कृषि विकास पर प्रभाव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस निवेश पर कंपनी को बधाई देते हुए कहा कि यह संयंत्र राज्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगा और आर्थिक प्रगति में योगदान देगा। उन्होंने इसे मध्य प्रदेश में वैश्विक कंपनियों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक बताया।
पेप्सिको इंडिया के सीईओ जागृत कोटेचा ने स्पष्ट किया कि यह संयंत्र कंपनी की ‘इन इंडिया, फॉर इंडिया’ रणनीति के अनुरूप है। पेप्सिको पहले से ही मध्य प्रदेश में अपने कृषि कार्यक्रम के तहत 2,000 से अधिक किसानों से जुड़ी हुई है, जो चिप्स निर्माण के लिए आलू की आपूर्ति करते हैं। नई इकाई के आने से राज्य के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण और स्थिरता (Sustainability) पर ध्यान
यह संयंत्र पेप्सिको की वैश्विक ‘पेप+’ (PepsiCo Positive) नीति के तहत संचालित होगा, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है:
100% नवीकरणीय ऊर्जा: यह संयंत्र पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी (सौर/पवन ऊर्जा) पर चलेगा।
शून्य अपशिष्ट: संयंत्र को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक पर डिजाइन किया गया है, जिससे तरल कचरे का उत्सर्जन शून्य होगा।
जल संरक्षण: इसमें उद्योग के अग्रणी जल दक्षता उपायों को लागू किया गया है, जिसके तहत परिचालन में उपयोग होने वाले 100% पानी की भरपाई (रीप्लेनिशमेंट) की जाएगी।
