श्रद्धालु ने गुप्त दान कर पेश की अनूठी मिसाल, गर्भगृह की दीवारों पर उकेरी गई बेहद आकर्षक नक्काशी
15 दिनों की अथक मेहनत के बाद कारीगरों ने गर्भगृह को दिया दिव्य और भव्य स्वरूप
डॉ.गौरव पेड़वा / उज्जैन माधव एक्सप्रेस/ विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी उज्जैन की आस्था के प्रमुख केंद्र और सदियों पुराने ऐतिहासिक चिंतामण गणेश मंदिर का गर्भगृह अब चांदी की दिव्य और अलौकिक आभा से जगमगा उठा है। मंदिर में आने वाले भक्तों को अब भगवान गणेश के तीन स्वरूपों के साथ-साथ गर्भगृह की अद्वितीय स्थापत्य कला के भी अलौकिक दर्शन लाभ मिल सकेंगे। यह भव्य कायाकल्प उज्जैन के ही एक स्थानीय श्रद्धालु की अनूठी भक्ति और गुप्त दान की मिसाल के कारण संभव हो सका है।
मंदिर प्रशासक अभिषेक शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि उज्जैन के एक स्थानीय श्रद्धालु ने अपनी पहचान और नाम को पूरी तरह गोपनीय रखने की इच्छा जताते हुए मंदिर को लगभग 35 किलोग्राम चांदी गुप्त दान के रूप में भेंट की थी। इस चांदी का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 85 लाख रुपये से अधिक आंका गया है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालु की भावना का सम्मान करते हुए इस संपूर्ण दान का उपयोग गर्भगृह की भव्यता को बढ़ाने और इसके जीर्णोद्धार के लिए करने का निर्णय लिया।
गर्भगृह की दीवारों को चांदी की परतों से सुसज्जित करने का यह चुनौतीपूर्ण और पवित्र कार्य करीब 15 दिनों में पूर्ण किया गया। राजस्थान और स्थानीय क्षेत्र के कुशल कारीगरों ने सबसे पहले चांदी की परतों पर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के अनुकूल विशेष धार्मिक डिजाइन और बेहद बारीक नक्काशी तैयार की। इसके पश्चात पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ इन नक्काशीदार चांदी की परतों को गर्भगृह की आंतरिक दीवारों पर स्थापित (वर्क) किया गया। कार्य संपन्न होने के बाद मंदिर की आध्यात्मिक और स्थापत्य सुंदरता में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
सदियों पुराना इतिहास और तीन गणेश का अनूठा महत्व
चिंतामण गणेश जो भक्तों के जीवन की समस्त चिंताओं, मानसिक तनावों और कष्टों का तत्काल निवारण करते हैं।
इच्छामन गणेश जो श्रद्धापूर्वक दरबार में हाजिरी लगाने वाले भक्तों की हर मनोकामना और इच्छा को पूर्ण करते हैं।
सिद्धि विनायक जो कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर कर सफलता, समृद्धि, व्यापारिक लाभ और रिद्धि-सिद्धि प्रदान करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ स्थापित तीनों प्रतिमाएं पूर्णतः स्वयंभू (स्वयं प्रकट हुई) हैं। यही कारण है कि वर्षभर देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर बप्पा के दरबार में शीश नवाने पहुँचते हैं। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस नई और दिव्य साज-सज्जा के बाद यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का धार्मिक अनुभव और अधिक समृद्ध तथा अलौकिक होगा।
