नई दिल्ली (ऊषा माहना / माधव एक्सप्रेस) ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के तत्वावधान में दिल्ली-एनसीआर की प्रमुख परिवहन यूनियनों ने 21 से 23 मई 2026 तक तीन दिवसीय सांकेतिक चक्का जाम करने का निर्णय लिया है। यह विरोध वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और दिल्ली सरकार द्वारा पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) में की गई भारी बढ़ोतरी तथा 1 नवंबर 2026 से बीएस-4 वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध के खिलाफ किया जा रहा है।
26 अप्रैल 2026 को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल के नेतृत्व में दिल्ली-एनसीआर की लगभग 60 से अधिक परिवहन यूनियनों एवं संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में ईसीसी बढ़ोतरी और नए प्रतिबंधों को लेकर गहरी चिंता और रोष व्यक्त किया गया।
डॉ. सभरवाल ने बताया कि ईसीसी बढ़ाने का मूल उद्देश्य केवल उन पारगमन (ट्रांजिट) वाहनों को नियंत्रित करना था, जो बिना किसी कार्य के दिल्ली से होकर गुजरते हैं। लेकिन वर्तमान में यह शुल्क उन वाहनों पर भी लागू कर दिया गया है, जो दिल्ली में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए आते हैं। इससे परिवहन व्यवसाय पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की आशंका है।
बैठक में यह भी बताया गया कि हल्के वाणिज्यिक वाहनों पर ईसीसी में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, वहीं भारी ट्रकों के लिए भी शुल्क में 40 से 55 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, जिससे पूरे देश के परिवहन संगठनों में नाराजगी बढ़ी है।
परिवहन संगठनों ने बीएस-4 वाणिज्यिक वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि इससे लाखों छोटे और मध्यम परिवहन संचालकों की आजीविका प्रभावित होगी। उनका तर्क है कि इन वाहनों को पूर्व में निर्धारित अवधि तक संचालन की अनुमति दी गई थी, ऐसे में अचानक प्रतिबंध लगाना न्यायसंगत नहीं है।
यूनियनों की प्रमुख मांगों में बढ़ा हुआ ईसीसी केवल पारगमन वाहनों पर लागू करना, बीएस-6 वाहनों को पूर्ण छूट देना, तथा बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध को चरणबद्ध तरीके से लागू करना शामिल है। साथ ही, वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को निर्धारित अवधि तक संचालन की अनुमति देने की भी मांग की गई है।
परिवहन संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 21 से 23 मई तक सांकेतिक चक्का जाम के बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन भी किया जा सकता है।
