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लेखक ✍️ देवेंद्र कुमार साहू
संपादक
माधव एक्सप्रेस
इंदौर शहर, जो अपनी स्वच्छता और व्यवस्थित शहरी जीवन के लिए देशभर में जाना जाता है, अब ट्रैफिक अनुशासन को लेकर भी एक नया उदाहरण पेश कर रहा है। हाल ही में ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों में इंदौर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर करीब 37 करोड़ रुपये के चालान काटे गए हैं, जो इस बात का संकेत है कि शहर में इस लापरवाही को लेकर कितनी गंभीर स्थिति बनी हुई थी।
ड्रिंक एंड ड्राइव केवल एक ट्रैफिक उल्लंघन नहीं, बल्कि यह सीधे-सीधे जानलेवा जोखिम है। नशे की हालत में वाहन चलाना न केवल चालक के लिए खतरनाक है, बल्कि सड़क पर मौजूद हर व्यक्ति की जिंदगी को खतरे में डाल देता है। ऐसे में इंदौर पुलिस की यह सख्ती सराहनीय भी है और जरूरी भी।
पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष अभियान, रात के समय चेकिंग, ब्रेथ एनालाइजर का उपयोग और लगातार निगरानी ने इस कार्रवाई को प्रभावी बनाया है। यही वजह है कि इतने बड़े स्तर पर चालान की राशि सामने आई है। यह आंकड़ा एक चेतावनी भी है कि यदि नियमों की अनदेखी की गई, तो उसका परिणाम आर्थिक और कानूनी दोनों रूपों में भुगतना पड़ेगा।
हालांकि, इस सख्ती के बीच एक जरूरी सवाल भी खड़ा होता है—क्या केवल चालान से समस्या का समाधान हो जाएगा? या फिर इसके साथ-साथ जनजागरूकता भी उतनी ही जरूरी है? विशेषज्ञ मानते हैं कि लोगों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना ही इस समस्या का स्थायी समाधान है। जब तक लोग खुद यह नहीं समझेंगे कि शराब पीकर वाहन चलाना उनकी और दूसरों की जिंदगी के लिए खतरा है, तब तक ऐसे अभियान चलते रहेंगे।
प्रशासन के लिए भी यह एक अवसर है कि वह चालान से प्राप्त राशि का उपयोग सड़क सुरक्षा, जागरूकता अभियान और बेहतर ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर में करे। इससे जनता का भरोसा बढ़ेगा और लोग नियमों के पालन के प्रति अधिक सजग होंगे।
अंततः, इंदौर पुलिस की यह कार्रवाई एक मजबूत संदेश देती है—सड़क पर लापरवाही की कोई जगह नहीं है। यदि हम एक सुरक्षित और अनुशासित शहर चाहते हैं, तो हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
जय हिंद, जय भारत।
