• 26 अप्रैल, 2026 को 54 जिलों में पहली पाली में 97,600 से अधिक उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए और दूसरी पाली में अन्य 96,273 उम्मीदवार बैठे।
• बेहतर पारदर्शिता और निगरानी के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली लागू की गई
• सेंट्रल कमांड कंट्रोल रूम के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी सक्षम की गई।
इंदौर, 27 अप्रैल, 2026: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) द्वारा 26 अप्रैल को प्रदेश के 54 जिला मुख्यालयों पर राज्य सेवा और राज्य वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 आयोजित की गई। 365 केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा के लिए 1.35 लाख उम्मीदवार पंजीकृत थे। आंकड़ों के अनुसार, पहली पाली में 97,644 और दूसरी पाली में 96,273 उम्मीदवार शामिल हुए, जो 70% से अधिक की औसत उपस्थिति को दर्शाता है।
परीक्षा से पहले, एमपीपीएससी ने 24 अप्रैल, 2026 को अपने इंदौर कार्यालय में एक कमांड कंट्रोल रूम स्थापित किया। माननीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) राजेश लाल मेहरा द्वारा उद्घाटन की गई इस कमांड कंट्रोल ने राज्य भर के केंद्रों की रियल-टाइम निगरानी को सक्षम बनाया और परीक्षा के सुचारू संचालन में सहायता प्रदान की।
परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए एमपीपीएससी द्वारा सभी केंद्रों पर त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई। अभ्यर्थियों को क्यूआर कोड आधारित बायोमेट्रिक जांच से गुजरना पड़ा, जिसमें फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन के जरिए उनकी पहचान सुनिश्चित की गई। इसके अलावा, सभी केंद्रों पर मानक प्रक्रिया के तहत हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर से जांच की गई। सभी परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनकी लाइव फीड कमांड कंट्रोल रूम से जुड़ी थी, जिससे लगातार निगरानी रखी जा सके। इस केंद्रीकृत व्यवस्था के माध्यम से अधिकारियों को सभी केंद्रों की गतिविधियों पर तुरंत नजर रखने और किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिली।
इस पहल पर बात करते हुए, एमपीपीएससी के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) राजेश लाल मेहरा ने कहा, “कमांड कंट्रोल रूम की स्थापना परीक्षाओं के संचालन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तकनीक आधारित निगरानी और बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के एकीकरण के साथ, हमारा लक्ष्य सभी उम्मीदवारों के लिए एक निष्पक्ष, पारदर्शी और बेहतरीन प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। यह सभी प्रयास परीक्षा प्रणाली की शुचिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के प्रति हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। इन सुविधाओं से परीक्षा प्रणाली में विश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी।”
आयोग ने सभी केंद्रों पर परीक्षा को सुचारू रूप से कराने के लिए जिला प्रशासन के साथ मिलकर पूरी तैयारी और जरूरी व्यवस्थाएं भी की थीं।
