संजय अग्रवाल
महाराष्ट्र के नासिक स्थित टीसीएस (Tata Consultancy Services) की ब्रांच में जो घिनौना खेल चल रहा था, वह अब नासिक तक ही सीमित नहीं रह गया है। आरोपों की लहर अब परतवाड़ा (अमरावती क्षेत्र) तक पहुंच चुकी है, जहां इसी तरह की जबरन धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न की घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं। पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है – ज्यादातर युवा हिंदू महिला कर्मचारी, जिन्हें न सिर्फ शारीरिक शोषण का शिकार बनाया गया, बल्कि उनके धर्म को लूटने, आस्था को कुचलने और परिवार की इज्जत को तार-तार करने की साजिश रची गई। एक पुरुष कर्मचारी की कहानी तो और भी दिल दहला देने वाली है – उसे जबरन स्कल कैप (टोपी) पहनाई गई, नमाज पढ़ने और कलमा बोलने के लिए मजबूर किया गया। जब उसने संतान की समस्या बताई तो आरोपी ने बेहद अश्लील और अपमानजनक टिप्पणी की – “अगर इलाज से बच्चा नहीं हो रहा तो अपनी पत्नी को मेरे पास भेज दो!”
यह कोई सामान्य कार्यस्थल विवाद नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नासिक टीसीएस के BPO यूनिट में टीम लीडरों, एचआर अधिकारियों (जैसे निदा खान) और कुछ कर्मचारियों ने मिलकर एक संगठित रैकेट चलाया। हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाया गया – उन्हें पैसे के लालच, परिवार की समस्याओं का फायदा उठाकर या डराकर इस्लाम अपनाने के लिए दबाव डाला गया। महिलाओं को रामजान के रोजे रखने, सिर ढकने, बीफ खाने और इस्लामी प्रथाओं को अपनाने के लिए मजबूर किया गया। मना करने पर यौन उत्पीड़न, धमकियां, फोन छीनना और यहां तक कि रूफटॉप पर अकेला छोड़कर प्रताड़ित करना जैसी घटनाएं हुईं। कुछ आरोपियों ने खुलकर कहा – “हिंदू लड़कियों से दोस्ती करो, शादी करो और उनका धर्म बदल दो।”
अब परतवाड़ा क्षेत्र में भी इसी पैटर्न की घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां स्थानीय स्तर पर आईटी/बीपीओ से जुड़े युवाओं पर इसी तरह का दबाव बनाने की खबरें हैं। नासिक और परतवाड़ा को मिलाकर यह साफ हो रहा है कि महाराष्ट्र के कई हिस्सों में एक बड़े पैमाने का “कॉर्पोरेट जिहाद” चल रहा है। मलेशिया कनेक्शन, रिजॉर्ट में मीटिंग्स और विदेशी फंडिंग के संकेत भी जांच एजेंसियों के सामने आए हैं। नासिक पुलिस ने 9 एफआईआर दर्ज की हैं, 7 लोगों को गिरफ्तार किया है (जिनमें मुख्य आरोपी तौसिफ अत्तर और निदा खान जैसे लोग शामिल हैं), लेकिन एचआर अधिकारी निदा खान अभी फरार है। टीसीएस ने कुछ कर्मचारियों को सस्पेंड किया है और पूरे ऑफिस को वर्क फ्रॉम होम पर भेज दिया है, लेकिन क्या यह पर्याप्त है?
वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन मध्य प्रदेश इस पूरे कांड की घोर निंदा करता है।* हमारी बेटियां, बहनें और माताएं जब नौकरी के लिए घर से बाहर निकलती हैं, तो क्या उन्हें इस तरह की सुरक्षा मिलनी चाहिए? क्या आईटी सेक्टर अब हिंदू युवाओं के लिए “धर्मांतरण और शोषण का अड्डा” बन गया है? टीसीएस जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में यह सब होना दर्शाता है कि समस्या गहरी और संगठित है।
पीड़ितों की कहानियां सुनकर किसी भी हिंदू का खून खौल उठता है। महिला कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें अकेला छोड़कर प्रताड़ित किया जाता था, परिवार की कमजोरियों का फायदा उठाया जाता था। पुरुष कर्मचारी को नमाज पढ़ने के लिए मजबूर करना हिंदू पुरुषत्व पर सीधा हमला है। एक गवाह ने खुलासा किया कि आरोपी खुलकर कहते थे – हिंदू लड़कियों को टारगेट करो और कन्वर्ट करो। यह “लव जिहाद” का नया कॉर्पोरेट रूप है, जो अब नासिक से परतवाड़ा तक फैल रहा है।
हमारी मांगें स्पष्ट हैं:*
1. सख्त कानूनी कार्रवाई* सभी आरोपियों पर IPC, POCSO, यौन उत्पीड़न कानून और राज्य के एंटी-कन्वर्शन कानूनों के तहत कड़ी सजा हो। NIA और ATS जांच में शामिल हों, मलेशिया लिंक की गहन जांच हो।
2. टीसीएस की जवाबदेही*: कंपनी तुरंत सभी पीड़ितों को उचित मुआवजा और सुरक्षा दे। पूरे कॉर्पोरेट सेक्टर में धर्मांतरण विरोधी और POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) नीतियों को सख्ती से लागू करे। दोषी अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए।
3. देशव्यापी और महाराष्ट्रव्यापी जांच* केवल नासिक-परतवाड़ा तक न रुकें। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, इंदौर और अन्य आईटी हब्स में ऐसी घटनाओं की SIT जांच हो। हिंदू कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित हो।
4. हिंदू समाज का जागरण* यह घटना हमें चेतावनी दे रही है। हर हिंदू परिवार को अपने बच्चों को सतर्क रहना सिखाना होगा। नौकरी के नाम पर धर्म, इज्जत और आस्था की बलि नहीं चढ़ाई जा सकती। हिंदू संगठन पीड़ितों को कानूनी, मानसिक और सामाजिक सहायता प्रदान करेंगे।
वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन मध्य प्रदेश के कार्यकर्ता नासिक और परतवाड़ा के पीड़ितों के संपर्क में हैं। हम उन्हें हर संभव मदद देंगे और न्याय की लड़ाई लड़ेंगे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी से हम अपील करते हैं कि इस मामले को “सेंसिटिव” बताकर दबाने की कोशिश न की जाए। यह हिंदू समाज की सुरक्षा और आस्था का सवाल है।
हिंदू अब जाग चुका है। हमारी बेटियों की इज्जत, हमारे परिवार की पवित्रता और हमारी सनातन संस्कृति पर कोई भी हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो लोग “साम्प्रदायिकता” का रोना रोकर इस जघन्य अपराध को ढंकना चाहते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए – जबरन धर्मांतरण और यौन शोषण कोई साम्प्रदायिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्र-विरोधी और मानवता-विरोधी अपराध है।
(लेखक वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हैं)
