सुशासन की मिसाल सीएम हेल्पलाइन- जनता की उम्मीदों पर खरी उतर रही डिजिटल पहल
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इंदौर। भाजपा नेता एवं सांसद प्रतिनिधि (जीएसटी विभाग) डॉ. संतोष वाधवानी ने Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर मेडिक्लेम एवं स्वास्थ्य बीमा सेवाओं पर जीएसटी पूर्णतः समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने इसे जनहित में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ व किफायती बनाने पर जोर दिया है।
डॉ. वाधवानी ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए समय-समय पर कई सकारात्मक निर्णय लिए गए हैं। इसी क्रम में जीएसटी परिषद द्वारा सितंबर 2025 से व्यक्तिगत जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा (Mediclaim) पॉलिसियों पर लागू 18% जीएसटी को शून्य किया गया, जिससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली है। इस निर्णय से विशेष रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग में स्वास्थ्य बीमा लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था में अभी कई सुधारों की आवश्यकता है। समूह स्वास्थ्य बीमा (Group Health Insurance) पर अभी भी लगभग 18% जीएसटी लागू है, जिससे कंपनियों और नियोक्ताओं द्वारा कर्मचारियों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं की लागत बढ़ जाती है। इससे कर्मचारियों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में बाधा उत्पन्न होती है।
डॉ. वाधवानी ने अपने पत्र में स्वास्थ्य क्षेत्र को जनकल्याणकारी बताते हुए कहा कि चिकित्सा सेवाएं, बीमा योजनाएं और स्वास्थ्य उपकरण आम नागरिक की बुनियादी आवश्यकता हैं। ऐसे में इन पर कर भार न्यूनतम या शून्य होना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि लगातार बढ़ती चिकित्सा लागत के बीच कराधान का अतिरिक्त बोझ आम लोगों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा प्राप्त करना और कठिन बना देता है।
उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि समूह स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी को समाप्त या न्यूनतम किया जाए, चिकित्सा उपकरणों, दवाओं और बीमा सेवाओं को “Essential Services” की श्रेणी में रखकर जीएसटी से मुक्त किया जाए। साथ ही, नियोक्ताओं को कर्मचारियों के लिए प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य बीमा योजनाओं पर व्यापक Input Tax Credit (ITC) की अनुमति दी जाए।
डॉ. वाधवानी ने यह भी कहा कि यदि स्वास्थ्य बीमा सेवाओं पर कर पूरी तरह समाप्त कर दिया जाता है, तो अधिक से अधिक लोग बीमा योजनाओं से जुड़ेंगे। इससे न केवल नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि दीर्घकाल में सरकार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय का बोझ भी कम होगा।
पत्र के अंत में उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी है। इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं और बीमा को कर भार से मुक्त करना एक जनहितकारी और आवश्यक कदम है। उन्होंने वित्त मंत्री से इस विषय पर सकारात्मक विचार कर आवश्यक निर्णय लेने का आग्रह किया है।
