संजय अग्रवाल
मध्यप्रदेश का औद्योगिक क्षेत्र आज एक गंभीर **संकट** के कगार पर खड़ा है ताजा ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, **पीथमपुर, सांवेर रोड और पालदा** समेत इंदौर के औद्योगिक क्षेत्रों में **5,600 से अधिक फैक्टरियां बंद होने की कगार** पर हैं। इजराइल-ईरान युद्ध (साथ में अमेरिका की भूमिका) के कारण मिडिल ईस्ट से आने वाले कच्चे माल की कीमतें **30% तक** बढ़ गई हैं, समुद्री मार्ग बाधित होने से **फ्रेट चार्ज 5 गुना** हो गया है और निर्यात लगभग ठप पड़ गया है।
परिणाम अत्यंत चिंताजनक हैं:
– **20 हजार से अधिक संविदा कर्मचारियों** को तत्काल नौकरी से निकाल दिया गया है।
– **30 हजार स्थायी कर्मचारियों** की सैलरी आधी कर दी गई है।
– तीन शिफ्ट का उत्पादन अब **मात्र एक शिफ्ट** में सिमट गया है।
– प्लास्टिक, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और केमिकल सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हैं।
– पीएनजी/प्राकृतिक गैस की आपूर्ति **55%** तक घटा दी गई है और देश में सबसे अधिक **14% VAT** मध्य प्रदेश ही ले रहा है, जिससे लागत अन्य राज्यों (गुजरात 5%, महाराष्ट्र 3%) की तुलना में 9-11% अधिक हो गई है।
यह कोई साधारण मंदी नहीं है। यह **हजारों परिवारों की रोजी-रोटी** पर सीधा हमला है। मजदूर गैस सिलेंडर भरने के लिए भी पैसे जुटाने में असमर्थ हैं। फार्मा कंपनियों के निर्यात रुकने से 190 देशों में दवाओं की सप्लाई प्रभावित हो रही है। अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट न सिर्फ एमएसएमई को नष्ट करेगा, बल्कि राज्य की जीडीपी, रोजगार और “विकसित मध्य प्रदेश” के आपके सपने को भी गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।
मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव से उम्मीद
कोरोना महामारी के कठिन समय में मध्यप्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र को विशेष राहत पैकेज देकर न केवल फैक्टरियों को बचाया, बल्कि रोजगार भी संरक्षित किया। बिजली बिल में छूट, टैक्स राहत, ब्याज सब्सिडी और अनुपालन में आसानी ने उद्योगों को सांस लेने का अवसर दिया। आज वैश्विक युद्ध और सप्लाई चेन संकट के इस दौर में **ठीक उसी तरह की तत्काल, मजबूत और व्यापक राहत** की जरूरत है।
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश
आत्मनिर्भर भारत” और मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के “विकसित मध्य प्रदेश” के विजन को साकार करने के लिए औद्योगिक मजबूती को राष्ट्र-निर्माण का आधार मानता है।
*आपातकालीन औद्योगिक राहत पैकेज की दरकार
1. **बिजली राहत**: सभी औद्योगिक यूनिटों को कम से कम 3-5 वर्षों तक **₹2 प्रति यूनिट** विशेष दर पर बिजली उपलब्ध कराई जाए तथा पुराने बकाया बिलों पर ब्याज पूरी तरह माफ किया जाए।
2. **टैक्स और शुल्क में छूट**: मंडी शुल्क और अन्य स्थानीय करों में **50% अस्थायी छूट**। नए निवेश और विस्तार पर अतिरिक्त इंसेंटिव।
3. **प्राकृतिक गैस संकट समाधान**: PNG पर VAT को **5%** तक कम किया जाए (अन्य प्रतिस्पर्धी राज्यों के बराबर) तथा आपूर्ति 100% बहाल की जाए।
4. **वित्तीय सहायता**: बैंकों के माध्यम से **बिना गारंटी** 2% ब्याज सब्सिडी वाले आपातकालीन कार्यशील पूंजी ऋण।
5. **लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल सपोर्ट**: आयातित कच्चे माल पर शुल्क में अस्थायी छूट तथा निर्यात फ्रेट पर **50% सब्सिडी**।
6. **श्रमिक संरक्षण पैकेज**: निकाले गए 20 हजार कर्मचारियों के लिए कौशल विकास और पुनर्वास सहायता। स्थायी कर्मचारियों की सैलरी के एक हिस्से पर सरकारी सहायता।
7. **अनुपालन में छूट**: प्रदूषण नियंत्रण, फैक्ट्री एक्ट और अन्य विभागीय निरीक्षणों में **6-12 महीने** की छूट तथा सिंगल विंडो सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाया जाए
सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और नई इंडस्ट्री पॉलिसी 2025 के माध्यम से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने जो जोश और विश्वास जगाया है, वह आज इन संकटग्रस्त 5,600 यूनिटों के लिए **जीवन रेखा** बन सकता है। यदि हम आज इन फैक्टरियों को बचाते हैं, तो न केवल **50 हजार से अधिक परिवारों** की आजीविका सुरक्षित रहेगी, बल्कि राज्य का निर्यात, रोजगार और औद्योगिक विकास भी मजबूत होगा।
हम पूर्ण विश्वास करते हैं कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव की प्रो-इंडस्ट्री, दूरदर्शी और मजबूत नेतृत्व वाली सोच इस वैश्विक संकट को अवसर में बदल देगी। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश आपके इस निर्णय का स्वागत करेगा और औद्योगिक पुनरुत्थान में हर संभव सहयोग देने के लिए तत्पर रहेगा।
*(लेखक श्री संजय अग्रवाल*
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हैं | लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी है , माधव एक्सप्रेस प्रबंधन एवं संपादक की सहमति आवश्यक नहीं है|)
