**वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश**
**अध्यक्ष श्री संजय अग्रवाल**
जय श्री राम! जय बजरंगबली!
चैत्र पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर समस्त हिंदू समाज हनुमान जन्मोत्सव मना रहा है। यह दिन केवल हनुमानजी के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि **अटूट भक्ति**, **अपरिमित शक्ति**, **बुद्धिमत्ता** और **निःस्वार्थ सेवा** का प्रतीक है। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश की ओर से मैं, आपका संजय अग्रवाल, पूरे मध्य प्रदेश के हिंदू भाइयों-बहनों, युवाओं, माताओं और बुजुर्गों को हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
मध्य प्रदेश की यह पवित्र भूमि, जहाँ राम-वनवास की स्मृतियाँ आज भी जीवंत हैं, आज हनुमान भक्ति की ज्योति से जगमगा रही है। आइए, इस अवसर पर हनुमानजी की कुछ प्रमुख लीलाओं को याद करें जो हमें जीवन जीने की सही राह दिखाती हैं।
### हनुमानजी की प्रमुख लीलाएँ – प्रेरणा का अनंत स्रोत
हनुमानजी की लीलाएँ रामायण के सुंदरकांड में विस्तार से वर्णित हैं। ये लीलाएँ केवल चमत्कार नहीं, बल्कि भक्ति और कर्म का आदर्श उदाहरण हैं:
**1. जन्म लीला और बाल लीला**
हनुमानजी का जन्म अंजना और केसरी के पुत्र के रूप में हुआ। पवन देव की कृपा से वे पवनपुत्र कहलाए। बाल्यावस्था में उन्होंने उदय होते सूर्य को लाल फल समझकर आकाश में उड़कर निगल लिया। इंद्र के वज्र प्रहार से उनका जबड़ा टूट गया, जिससे वे “हनुमान” नाम से प्रसिद्ध हुए। देवताओं ने उन्हें अनेक वरदान दिए – अपरिमित बल, बुद्धि, रूप परिवर्तन और चिरंजीवी होने का वर। यह लीला उनके **निश्छल स्वभाव** और **असीम शक्ति** को दर्शाती है।
**2. समुद्र लंघन की अद्भुत लीला**
सीताजी की खोज में हनुमानजी ने महेंद्र पर्वत से विशाल रूप धारण कर सैकड़ों योजन चौड़े समुद्र को एक छलांग में पार कर लिया। रास्ते में सुरसा और सिंहिका जैसी बाधाओं को उन्होंने अपनी बुद्धि और बल से पार किया। यह लीला **संकल्प शक्ति** और **बाधाओं पर विजय** का अनुपम उदाहरण है। आज के युवाओं को सिखाती है कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं, यदि संकल्प दृढ़ हो।
**3. अशोक वाटिका में सीताजी से भेंट**
लंका पहुँचकर हनुमानजी ने छोटे रूप में अशोक वाटिका में प्रवेश किया। उन्होंने सीताजी को राम का संदेश दिया, अंगूठी पहनाई और उनका शोक निवारण किया। इस लीला में उन्होंने अपनी **भक्ति** और **संदेशवाहक** की भूमिका को पूर्ण किया। सीताजी को आश्वस्त किया कि श्रीराम जल्द ही उनकी रक्षा के लिए आएँगे।
**4. लंका दहन की वीर लीला**
रावण की सभा में हनुमानजी ने निर्भय होकर राम का संदेश सुनाया। रावण के आदेश पर जब उनकी पूँछ में आग लगाई गई, तो उन्होंने विशाल रूप धारण कर लंका के स्वर्णमय नगर को जलती पूँछ से भस्म कर दिया। यह लीला उनकी **वीरता**, **चतुराई** और **राम के प्रति समर्पण** को दिखाती है। उन्होंने रावण को भी चेतावनी दी कि अन्याय का अंत निश्चित है।
**5. संजीवनी बूटी की महान लीला**
युद्ध के दौरान इंद्रजित के ब्रह्मास्त्र से लक्ष्मणजी घायल हो गए। समय की कमी थी। हनुमानजी हिमालय पहुँचे और जब संजीवनी बूटी पहचान न सकी, तो उन्होंने पूरा **द्रोणागिरि पर्वत** ही उखाड़ लिया और लंका ले आए। लक्ष्मणजी की प्राणरक्षा हुई। यह लीला **समयबद्ध सेवा**, **दृढ़ निश्चय** और **असीम बल** का चरम उदाहरण है।
ये सभी लीलाएँ एक ही संदेश देती हैं – **“राम काज करिबे को आवत, धीरज धरि महाप्रभु चले।”** हनुमानजी ने कभी अपना यश या बल नहीं चाहा, केवल श्रीराम की सेवा की।
### आज के युग में हनुमानजी का संदेश
आज भौतिकवाद और तनाव के इस युग में हनुमानजी हमें सिखाते हैं:
– शक्ति को संयमित रखकर सही दिशा में लगाओ।
– बुद्धि का उपयोग राष्ट्र और समाज की सेवा में करो।
– संकट में भी हिम्मत न हारो और भक्ति में दृढ़ रहो।
– निःस्वार्थ सेवा ही सच्ची भक्ति है।
मध्य प्रदेश में हमारी प्राचीन परंपरा को जीवंत रखते हुए वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश हर वर्ष हनुमान जन्मोत्सव को भव्य रूप से मनाता है। खजुराहो, उज्जैन, चित्रकूट, ओरछा और प्रदेश के कोने-कोने में हनुमान चालीसा पाठ, रामधुन और सेवा कार्यों का आयोजन किया जाएगा।
हमारा आह्वान
मैं सभी हिंदू भाइयों-बहनों से अपील करता हूँ:
– हनुमान जन्मोत्सव को घर-घर में मनाएँ।
– रोज हनुमान चालीसा का पाठ करें – इससे बल, बुद्धि और शांति मिलती है।
– सेवा कार्य में भाग लें – गरीबों को भोजन, छात्रों को संस्कार, युवाओं को राम-भक्ति।
– हिंदू एकता को मजबूत करें। हम सब राम के भक्त हैं।
आइए, इस हनुमान जन्मोत्सव पर हम संकल्प लें कि हम अपनी संस्कृति, परंपरा और मातृभूमि की रक्षा के लिए हनुमानजी की भक्ति को अपने जीवन में उतारेंगे।
**जय हनुमान! जय श्री राम!**
**भारत माता की जय!**
**सर्वे भवन्तु सुखिनः**
**सर्वे सन्तु निरामयाः**
आपका अपना,
**संजय अग्रवाल**
अध्यक्ष, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश
हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ!
जय बजरंगबली! 🙏🛕
