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चंदेरी। ऐतिहासिक नगरी चंदेरी की प्राचीन ईदगाह में इस वर्ष ईद-उल-फितर की 548वीं नमाज़ अदा की गई, जो इस स्थल की समृद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक परंपरा को दर्शाती है। जानकारी के अनुसार, इस ईदगाह का निर्माण सन् 1495 ईस्वी में चंदेरी के तत्कालीन गवर्नर शेरखान द्वारा कराया गया था। उल्लेखनीय है कि यह ईदगाह 13 ,रमजान मुताबिक 7, जून, 1495, ईस्वी, को बनकर तैयार हुई थी।
इतिहास के इस क्रम में अब तक यहां ईद-उल-फितर की 548 नमाज़ें अदा की जा चुकी हैं, जबकि ईद-उल-अज़हा (बकरीद) और रमज़ान ईद मिलाकर कुल 1096 नमाज़ें संपन्न हो चुकी हैं। यह आंकड़ा इस स्थल की निरंतर धार्मिक सक्रियता और आस्था का प्रमाण है।
स्थानीय परंपराओं के अनुसार, शेरखान के इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए चंदेरी के लोगों ने उन्हें “मसनदे आली” और “अल्लाह का शेर” जैसी सम्मानित उपाधियों से नवाज़ा था। ईदगाह में लगे शिलालेख में यह दुआ भी अंकित है कि यहां जुमे और ईद की नमाज़ें तब तक अदा होती रहें, जब तक आसमान कायम रहे।
इतिहासकारों के अनुसार, शेरखान ने लगभग 31 वर्षों तक चंदेरी के गवर्नर के रूप में अपनी सेवाएं दीं और अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य कराए। चंदेरी ईदगाह के शाही इमाम हाफिज जाबिर साहब ने ईद की नमाज़ अदा कराई , चन्देरी और आस पास के गाँव के हज़ारों लोगों ने आईडी की नमाज़ अदा की ।
चंदेरी की यह ईदगाह आज भी न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर के रूप में भी अपनी पहचान बनाए हुए है।
