नई दिल्ली (माधव एक्सप्रेस/ ऊषा माहना)
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (ए. आई. एम. टी. सी.) की तीसरी राष्ट्रीय गवर्निंग बॉडी (एन. जी. बी.) की बैठक नई दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री हरीश सभरवाल की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक आयोजित की गई।
इस बैठक में देशभर से आए ए.आई.एम.टी.सी. के राष्ट्रीय पदाधिकारी, एड्वाइज़री बोर्ड मेम्बरस, ज़ोनल प्रतिनिधि, राज्य इकाइयों के सदस्य और देश भर से आए सड़क परिवहन उद्योग के वरिष्ठ सदस्य शामिल हुए। बैठक में डॉ जी. आर. शनमुगप्पा, चेयरमैन, श्री गुरिंदर पाल सिंह, पूर्व अध्यक्ष, श्री भीम वाधवा, पूर्व अध्यक्ष, श्री जितेंद्र साँघवी, उपाध्यक्ष (वेस्ट ज़ोन), आदि ने भाग लिया|
बैठक में देश के तकरीबन हर प्रांत से आए ट्रांसपोर्ट के लीडर्स ने अपना अपना पूर्ण योगदान व सक्रिय भूमिका निभाई।
उन्होंने राष्ट्रीय परिवहन नीति की आवश्यकता पर जोर देते हुए पूरे देश में समान मोटर वाहन कर व्यवस्था, कंसाइनर द्वारा ट्रांजिट इंश्योरेंस की अनिवार्यता, परमिट नियमों के सरलीकरण तथा डिजिटल अनुपालन के लिए एक समग्र नीति बनाने की मांग रखी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत घटे और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनस को बढ़ावा मिले।
उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन वर्तमान नीतियों और लागू व्यवस्थाओं के कारण यह क्षेत्र गहरे संकट में है। कई समस्याएं काफी समय से लंबित हैं और अब गंभीर स्थिति में पहुंच गई हैं। इस कारण सड़क परिवहन समुदाय इस व्यवसाय को और आगे ले जाने में असमर्थ है।
ई चालान प्रणाली पर गंभीर आपत्तियां
डॉ हरीश सभारवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं डॉ जी. आर. शनमुगप्पा, चेयरमैन ने बताया कि ई चालान प्रणाली में विसंगतियों से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के साथ साथ आम नागरिक भी त्रस्त है |
डॉ हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान ई-चालान प्रणाली में कई गंभीर खामियां हैं, जो सड़क परिवहन क्षेत्र के लिए अत्यंत चिंता का विषय हैं जो भ्रष्टाचार और अन्याय का एक बड़ा माध्यम बन गई है। कई बार सिर्फ स्थिर फोटो से बिना चालक की जानकारी के तुरंत चालान जारी कर दिए जाते हैं, जिससे निर्दोष वाहन मालिक बड़ी परेशानी में फंस जाते हैं। कई साक्ष्यों में वाहन किसी और प्रदेश में होता है और चालान किसी और प्रदेश में होता है | अधिकांश ई-चालानों में वैज्ञानिक रूप से सत्यापित प्रमाणों का अभाव है। कई मामलों में केवल स्थिर (स्टैटिक) तस्वीरों के आधार पर चालान काट दिए जाते हैं, जबकि वाहन के सभी दस्तावेज पूरी तरह वैध और सही होते हैं।
ई-चालान से जुड़ी शिकायतों के लिए कोई प्रभावी और समयबद्ध निवारण व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। कई बार परिवहनकर्ताओं को बिना किसी गलती के भी राहत पाने के लिए अदालतों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे अनावश्यक आर्थिक और संचालन संबंधी कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं।
उन्होनें कहा हर ई चालान के साथ वैज्ञानिक रूप से सत्यापित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (जैसे सी. सी. टी. वी. फुटेज या बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग) अनिवार्य होना चाहिए। सिर्फ फोटो पर आधारित चालान को अवैध माना जाए | वाहन को ब्लैकलिस्ट या “नॉट टू बी ट्रांजैक्टेड” घोषित करने की शक्ति केवल न्यायालय ही रखे, प्रशासन द्वारा एकतरफा दंड न लगाया जाए।
जिला, राज्य और केंद्र स्तर पर स्वतंत्र ट्रैफिक ट्रिब्यूनल या अपीलीय प्राधिकरण स्थापित किए जाएं, ताकि विवादों का निपटारा प्रवर्तन एजेंसियों के बजाय स्वतंत्र संस्थाएं करें।
उन्होंने बताया कि ए. आई. एम. टी. सी. ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ई-चालान से संबंदित 29 सितंबर 2025 की ड्राफ्ट अधिसूचना जी.एस.आर. 723(ई) और सी. एम. वी. आर. नियम 167 व 167 अ के संशोधनों पर गहरी आपत्ति जताई है पर उसपर कोई अमल ना करते हुए फाइनल नोटफकैशन जारी कर दी गई है और ए. आई. एम. टी. सी. ने इन पर पुनर्विचार की मांग की है।“
टोल टैक्स और लगातार बढ़ती लागत पर भी गहन चर्चा हुई | ए. आई. एम. टी. सी. के चेयरमैन डॉ जी. आर. शनमुगप्पा ने टोल वसूली के कई गलत पहलुओं को उजागर किया और उन पर आपत्ति उठाई। उनका कहना है कि कई स्थानों पर पूंजी लागत वसूलने के बाद भी 100 % तक टोल वसूला जा रहा है, जोकि रख-रखाव के लिए सिर्फ 40% होना चाहिए, जबकि रास्ते खराब और खतरनाक हैं। फास्टैग से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियां भी चालकों को लगातार परेशान कर रही हैं।
डॉ जी. आर. शनमुगप्पा, चेयरमैन – ए. आई. एम. टी. सी. ने साफ साफ कहा कि टोल नीति पारदर्शी और न्यायसंगत होनी चाहिए और जहां टोल लागत पूरी वसूली जा चुकी उन टोल प्लाज़ा पर टोल दर 40% होनी चाहिए, जैसा पहले नियम था । संगठन ने इस विषय पर सरकार से तुरंत संशोधित नीति लाने की मांग की है।
इसके अलावा, बैठक में दिल्ली में बी. एस्. VI वाहनों पर लगे पर्यावरण मुआवजा सेस (एन. जी. टी. टैक्स) के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में चल रही ए. आई. एम. टी. सी. की याचिका जारी रखने का निर्णय लिया गया। साथ ही आयकर कानून की धारा 194 स (6) के तहत 10 या उससे कम वाहनों के मालिकों को टी.डी.एस. डेक्लरैशन की जटिल व्यवस्था के कारण आ रहे नोटिस पर भी विरोध जताया गया और परिवहन सेवाओं को टी.डी.एस. से छूट या नियमों को बहुत सरल बनाने की मांग की गई।
बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई:
• कुछ राज्यों में जारी बॉर्डर चेकपोस्ट, और जहां बॉर्डर चेकपोस्ट हट गए हैं वहाँ आरटीओ फ्लाइंग स्क्वाड के द्वारा होने वाले उत्पीड़न के खिलाफ यह मांग की गई कि सभी राज्यों में बॉर्डर चेकपोस्ट समाप्त किए जाएं, डिजिटल दस्तावेजों को मान्यता दी जाए और आरटीओ फ्लाइंग स्क्वाड को बंद किया जाए ताकि अनावश्यक जुर्माने व भ्रष्टाचार पर रोक लगे।
• बसों में वाणिज्यिक सामान ढुलाई के मुद्दे पर सदस्यों ने चिंता व्यक्त की। ए.आई.एम.टी.सी. ने स्पष्ट किया कि बस बॉडी कोड से प्रभावित बस ऑपरेटरों की समस्याओं के समाधान हेतु संगठन प्रयास जारी रखेगा। साथ ही राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में बसों में वाणिज्यिक माल ढुलाई को वैध बनाने की प्रक्रिया का सदस्यों ने कड़ा विरोध किया, क्योंकि इससे यात्रियों कि सुरक्षा के साथ खिलवाड़, जीएसटी की चोरी और ट्रक ऑपरेटरों को व्यवपरिक नुकसान हो रहा है ।
• मालवाहक वाहनों में ए.आई.एस. 140 आधारित वी.एल.टी.डी. अनिवार्यता को अव्यावहारिक और लागत बढ़ाने वाला बताया गया तथा इसे अनिवार्य न करने की मांग रखी गई।
• मैनुअल फिट्नस सेंटर बंद होने और औटोमटेड फिट्नस स्टेशन (ए.टी.एस.) पर फिट्नस करने कि अनिवार्यता के कारण परिवहन व्यवसाइयों को हो रही परेशानी पर विस्तृत चर्चा हुई | जहाँ औटोमटेड फिट्नस स्टेशन उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ मैनुअल फिटनेस परीक्षण जारी रखने की मांग भी दोहराई गई ताकि ट्रकों और बसों का संचालन बाधित न हो।
छोटे ऑपरेटरों की जीविका खतरे में
डॉ हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष – ए.आई.एम.टी.सी. ने बताया कि देश में लगभग 80–85% वाणिज्यिक वाहन छोटे ऑपरेटरों के हाथों में हैं, जिनमें से अधिकांश स्व नियोजित “मालिक चालक” हैं। लगातार बढ़ती ईंधन लागत, टोल, ई चालान जुर्माने और अनावश्यक जब्ती के दबाव में ये छोटे ऑपरेटर अपनी आजीविका खोते जा रहे हैं। इससे सीधे तौर पर करोड़ों परिवारों की रोजी रोटी खतरे में पड़ रही है। उन्होनें कहा कि ए. आई. एम. टी. सी. का उद्देश्य परिवहन उद्योग को सशक्त बनाना, ड्राइवरों एवं ऑपरेटरों की समस्याओं का समाधान करना तथा नीति-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाना है। उन्होंने सभी सदस्यों से एकजुट होकर परिवहन व्यापार के हित में कार्य करने का आह्वान किया।
ई चालान के दुरुप्रयोग और टोल पर लूट के खिलाफ राष्ट्रव्यापी चक्काजाम की घोषणा
बैठक में ई चालान के दुरुपयोग, टोल प्लाजा पर लूट और वाहनों से जुड़े अन्य उत्पीड़न के मुद्दों पर तीखी चिंता व्यक्त की गई। सदस्यों ने अपील की कि इन समस्याओं को तुरंत हल किया जाए, अन्यथा देशव्यापी चक्काजाम और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं ट्रांसपोर्ट व्यवसाई ।
बैठक में सर्वसंमिति से यह निर्णय लिया गया कि ई चालान के दुरुप्रयोग, टोल प्लाजा पर उत्पीड़न और वाहन फिटनेस जैसे मुद्दों को औपचारिक रूप से सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। मीडिया के माध्यम से भी जन जागरूकता बढ़ाई जाएगी ताकि आम नागरिक भी इन व्यवस्थाओं की गड़बड़ियों से अवगत रहें। अगर सरकार इन लंबित मुद्दों पर कोई व्यावहारिक और न्यायसंगत समाधान नहीं लाती है, तो ए.आई.एम.टी.सी. के शीर्ष नेतृत्व द्वारा राष्ट्रव्यापी अनिश्चितकालीन चक्काजाम करने का निर्णय लिया जा सकता है |
बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने परिवहन उद्योग के विकास, पारदर्शी नीतियों और ऑपरेटरों के हितों की रक्षा हेतु ए. आई. एम. टी. सी. के प्रयासों को और मजबूत करने का संकल्प लिया।
