इंदौर, 24 फरवरी 2026 – वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष श्री संजय अग्रवाल ने आज एक विज्ञप्ति जारी कर उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सनातन धर्म की पवित्रता, परंपराओं और आध्यात्मिक ऊर्जा की रक्षा के लिए तत्काल एवं सख्त कदम उठाने की मांग की है। साथ ही, हाल ही में लागू संध्या आरती एवं शयन आरती दर्शन पर 250-250 रुपये के शुल्क का भी कड़ा विरोध किया है, क्योंकि इससे गरीब एवं आम श्रद्धालु महाकाल बाबा के दर्शन से वंचित हो जाएंगे।
श्री अग्रवाल ने कहा कि जिस प्रकार उत्तराखंड के चार धाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) और उनके अधीन आने वाले लगभग 48-50 प्रमुख तीर्थ स्थलों में गैर-सनातनी व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है, साथ ही रामेश्वर धाम जैसे अन्य प्रमुख ज्योतिर्लिंग एवं दक्षिणी मंदिरों में सनातन परंपराओं का सख्त पालन होता है, वैसी ही व्यवस्था महाकाल मंदिर में भी अनिवार्य रूप से लागू की जानी चाहिए।
यह मांग इसलिए और अधिक प्रासंगिक हो गई है क्योंकि हाल ही में महाकाल मंदिर में कुछ गैर-धार्मिक या संदिग्ध गतिविधियों की घटनाएं सामने आई हैं, जैसे कि वर्ग विशेष के व्यक्तियों द्वारा नाम बदलकर या अन्य तरीकों से मंदिर में प्रवेश कर अवांछित व्यवहार करना, रील/वीडियो बनाना, या पवित्र प्रसाद/परिसर को प्रभावित करना। श्री अग्रवाल ने जोर दिया कि महाकाल मंदिर पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख आस्था का केंद्र है, जहां केवल शुद्ध भक्ति और सनातन मूल्यों का सम्मान होना चाहिए।
पृष्ठभूमि और मांग का आधार
चार धाम में वर्तमान स्थिति: जनवरी-फरवरी 2026 में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने स्पष्ट प्रस्ताव पारित किया है कि बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री सहित 48 प्रमुख तीर्थों में गैर-हिंदुओं (मुख्यतः मुस्लिम, ईसाई आदि) का प्रवेश प्रतिबंधित होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी संस्थाओं के मत के अनुसार कार्रवाई की बात कही है। साधु-संतों ने इसका स्वागत किया है, क्योंकि यह धार्मिक पवित्रता और वैदिक परंपराओं की रक्षा करता है। सिख, जैन, बौद्ध जैसे भारतीय धर्मों के अनुयायियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होता।
रामेश्वर धाम (रामेश्वरम): रामनाथस्वामी मंदिर (रामेश्वर ज्योतिर्लिंग) में भी परंपरागत रूप से सनातन नियमों का पालन होता है। कई दक्षिण भारतीय मंदिरों की तरह यहां भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर सख्ती बरती जाती है। श्री अग्रवाल ने कहा कि महाकाल मंदिर में भी इसी तरह की नीति अपनाकर आध्यात्मिक ऊर्जा को अक्षुण्ण रखा जा सकता है।
हाल की घटनाएं: श्री अग्रवाल ने उल्लेख किया कि हाल ही में एक वर्ग विशेष का व्यक्ति नाम बदलकर या अन्य तरीके से मंदिर में प्रवेश कर गैर-धार्मिक गतिविधि में लगा, जिससे पवित्रता प्रभावित हुई। कई श्रद्धालु अब दर्शन कम और रील/वीडियो बनाने ज्यादा आते हैं, जिससे भक्ति का माहौल खराब होता है।
दक्षिण भारत के मंदिरों में ड्रेस कोड: तिरुपति बालाजी, पद्मनाभस्वामी (केरल), मीनाक्षी अम्मन (मदुरै), गुरुवायुर आदि में सख्त ड्रेस कोड है – पुरुषों के लिए धोती/लुंगी, महिलाओं के लिए साड़ी/सलवार कमीज (दुपट्टा सहित)। पश्चिमी वस्त्र (जींस, शॉर्ट्स, टैंक टॉप) पूर्णतः वर्जित। श्री अग्रवाल ने हाल ही में दक्षिण भारत की धार्मिक यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां का अनुशासन देखकर स्पष्ट है कि ड्रेस कोड भक्ति, सम्मान और पवित्रता बढ़ाता है। महाकाल में भी यही लागू हो।
श्री अग्रवाल ने चिंता जताई कि वर्तमान में महाकाल मंदिर में कोई सख्त धार्मिक पहचान या वस्त्र नियम नहीं हैं, जिससे अवांछित तत्व प्रवेश कर जाते हैं। उन्होंने मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैमरा आदि पर पूर्ण प्रतिबंध की भी मांग की है।
संध्या एवं शयन आरती पर शुल्क का विरोध
हाल ही में (फरवरी 2026) महाकालेश्वर मंदिर समिति द्वारा संध्या आरती (शाम लगभग 7 बजे) और शयन आरती (रात 10:30-11 बजे) के लिए अनिवार्य ऑनलाइन बुकिंग शुरू की गई है, जिसमें प्रति व्यक्ति 250 रुपये शुल्क (शीघ्र दर्शन के समान) तय किया गया है। बुकिंग अधिकृत वेबसाइट (shrimahakaleshwar.mp.gov.in) से होती है – संध्या आरती के लिए दोपहर 12 बजे से, शयन आरती के लिए शाम 4 बजे से।
श्री अग्रवाल ने कहा, “भगवान महाकाल के दरबार में राजा-रंक बराबर होते हैं। यह शुल्क व्यवस्था गरीब श्रद्धालुओं को आस्था के इस पवित्र अनुभव से दूर कर देगी। पहले ये आरतियां सामान्य दर्शन की तरह मुफ्त उपलब्ध थीं, अब ‘पे एंड प्रे’ मॉडल से भक्ति आर्थिक आधार पर बंट रही है। यह सनातन परंपरा के विरुद्ध है और मुगलकालीन जजिया कर जैसा लगता है। हम मांग करते हैं कि इस शुल्क को तत्काल वापस लिया जाए, ताकि सभी भक्त बिना किसी भेदभाव के महाकाल बाबा की आरती में शामिल हो सकें।”
प्रस्तावित नियम और अपेक्षित लाभ
गैर-सनातनी/गैर-हिंदू व्यक्तियों पर प्रतिबंध: केवल सनातन धर्म (हिंदू) के अनुयायी ही मुख्य मंदिर में प्रवेश कर सकें। प्रवेश द्वार पर पहचान पत्र, आधार कार्ड की जांच। लाभ: मंदिर की सुरक्षा, पवित्रता और ऊर्जा संरक्षण।
सख्त ड्रेस कोड: पुरुष: धोती, कुर्ता-पायजामा या पारंपरिक भारतीय वस्त्र। महिलाएं: साड़ी, सलवार कमीज (दुपट्टा सहित), लहंगा चोली। बच्चे: उचित पारंपरिक परिधान। पश्चिमी/अनुचित वस्त्र पर रोक; मंदिर परिसर में बदलने/उपलब्ध कराने की व्यवस्था। लाभ: अनुशासन, भक्ति भावना और सांस्कृतिक सम्मान में वृद्धि।
अन्य सख्त उपाय: मोबाइल फोन, कैमरा, स्मार्ट वॉच, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध (चार धाम की तर्ज पर)। जागरूकता अभियान, होर्डिंग, प्रवेश पर नियम बोर्ड। लाभ: शांत, भक्तिमय वातावरण; रील/वीडियो से होने वाली व्यवधान समाप्त।
संध्या/शयन आरती पर शुल्क वापसी: इन आरतियों को मुफ्त/सामान्य दर्शन की तरह उपलब्ध रखा जाए। केवल VIP/शीघ्र दर्शन के लिए अलग व्यवस्था हो।
श्री अग्रवाल ने कहा कि ये नियम लागू होने से महाकाल मंदिर की सांस्कृतिक विरासत बचेगी, श्रद्धालुओं को शुद्ध आध्यात्मिक अनुभव मिलेगा और हिंदू समाज एकजुट होगा।
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन का योगदान
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन एक वैश्विक संगठन है जो हिंदू अधिकारों, संस्कृति, सनातन परंपराओं की रक्षा और शिक्षा प्रसार के लिए कार्यरत है। मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष श्री संजय अग्रवाल ने मंदिरों में सरकारी हस्तक्षेप विरोध, त्योहार सुरक्षा, सनातन शिक्षा जैसे अभियान चलाए हैं।
उन्होंने सभी हिंदू संगठनों, साधु-संतों से समर्थन की अपील की है। मीडिया से अनुरोध है कि इस मुद्दे को प्रमुखता दी जाए ताकि मध्य प्रदेश सरकार, उज्जैन मंदिर ट्रस्ट और केंद्र पर दबाव बने।
जय महाकाल! जय सनातन!
