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इन्दौर l मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद में आज इंदौर हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सौंपी गई वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को लेकर आगे की प्रक्रिया निर्धारित की। कोर्ट कार्यवाही के मुख्य बिंदु – • रिपोर्ट पर आपत्तियों के लिए समय: हाई कोर्ट ने मामले के सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को एएसआई की 2000 पन्नों की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। सभी पक्षों को इस अवधि के भीतर अपनी आपत्तियां, सुझाव या सिफारिशें लिखित रूप में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होंगी। • सर्वे रिपोर्ट की उपलब्धता: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट को पहले ही अनसील (unseal) किया जा चुका है और इसकी प्रतियां सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई हैं। इसलिए, इसे दोबारा सार्वजनिक रूप से खोलने की आवश्यकता नहीं है। • अगली सुनवाई की तिथि: मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई अब 16 मार्च, 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें प्राप्त आपत्तियों पर विचार किया जाएगा। • यथास्थिति (Status Quo) बरकरार: अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक मामले का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक परिसर में यथास्थिति बनी रहेगी। इसका अर्थ है कि एएसआई के 2003 के आदेशानुसार वर्तमान व्यवस्था (मंगलवार को हिंदुओं की पूजा और शुक्रवार को मुस्लिमों की नमाज) जारी रहेगी। बता दें कि हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के 22 जनवरी, 2026 के उस निर्देश के बाद हुई है, जिसमें हाई कोर्ट को तीन सप्ताह के भीतर वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को अनसील करने और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। एएसआई ने मार्च 2024 में हाई कोर्ट के आदेश पर 98 दिनों तक परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट जुलाई 2024 में कोर्ट में पेश की गई थी। वहीं एएसआई सर्वे रिपोर्ट के बारे में बताया जा रहा है कि एएसआई ने यह 2000 पन्नों की रिपोर्ट जुलाई 2024 में सौंपी थी, जो 98 दिनों तक चले वैज्ञानिक सर्वे पर आधारित है। जिसमें परिसर के भीतर 11वीं शताब्दी के परमार कालीन अवशेष, संस्कृत शिलालेख, देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां और हिंदू धर्म से जुड़ी कलाकृतियों के साक्ष्य मिलने का उल्लेख है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने इन निष्कर्षों पर सवाल उठाए हैं और अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की बात कही है। आज की सुनवाई ने इस दशकों पुराने विवाद के कानूनी समाधान की दिशा में एक स्पष्ट मार्ग प्रशस्त किया है। अब 16 मार्च को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जहाँ रिपोर्ट की वैज्ञानिकता और उस पर उठने वाली आपत्तियों पर बहस होगी।
