संजय अग्रवाल
आज 21 फरवरी 2026 को इंदौर की धरती पर जो दृश्य देखने को मिला, वह मध्य प्रदेश की राजनीति की एक बड़ी विडंबना को उजागर करता है। दिल्ली में भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए शर्मनाक अर्धनग्न प्रदर्शन के विरोध में भाजपा युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ताओं ने इंदौर के कांग्रेस मुख्यालय गांधी भवन पर घेराव किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गई, पत्थरबाजी हुई, टमाटर-पानी की बोतलें चलीं और अफरा-तफरी मच गई। एक पुलिस अधिकारी, दो पत्रकार समेत लगभग 10 लोग घायल हुए। पुलिस को पानी की बौछारें चलानी पड़ीं।
यह घटना सोचने पर मजबूर करती है – क्या भाजपा इंदौर जैसे अपने अभेद्य गढ़ में कांग्रेस के खिलाफ इतना आक्रामक रुख अपनाकर वास्तव में अपनी जीत को मजबूत कर रही है, या वह मरणासन्न कांग्रेस को कृत्रिम ऑक्सीजन देकर उसे नया जीवन दे रही है?
मध्य प्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है। इंदौर, जो कभी कांग्रेस का भी मजबूत केंद्र रहा, आज भाजपा का सबसे बड़ा किला बन चुका है। कांग्रेस के पास न संगठन बचा है, न लोकप्रिय नेता, न जनता का विश्वास। भ्रष्टाचार के घोटाले, परिवारवाद, राष्ट्र-विरोधी बयानबाजी और विकास-विरोधी रवैये ने इस पार्टी को जनता की नजरों में अप्रासंगिक बना दिया। पार्टी लगभग ‘मरणासन्न’ अवस्था में पहुंच चुकी थी – जैसे कोई रोगी आईसीयू में सांसें गिन रहा हो। इंदौर में तो उसके कार्यकर्ता भी हताश और बिखरे हुए थे।
लेकिन दुर्भाग्य से, भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं की ‘सड़क-राजनीति’ इस मरते हुए रोगी को बार-बार जिंदा कर रही है। गांधी भवन पर घेराव, लगातार विरोध प्रदर्शन, नारेबाजी और झड़पें – ये सब कांग्रेस को वह मीडिया कवरेज, सहानुभूति और एकता का मौका दे रहे हैं जिसकी उसे सख्त जरूरत थी। मरते हुए व्यक्ति को बार-बार उकसाने से वह फिर से सक्रिय हो जाता है। आज की घटना में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को ‘पीड़ित’ का लेबल मिल गया है। सोशल मीडिया, समाचार चैनल और स्थानीय अखबारों में उनकी तस्वीरें और बयान घूम रहे हैं। जो कार्यकर्ता घर बैठे थे, उन्हें अब ‘लड़ाई’ का मुद्दा मिल गया है।
हम विश्व हिंदू फेडरेशन के कार्यकर्ताओं के रूप में हमेशा सनातन संस्कृति, हिंदू एकता और राष्ट्र-निर्माण की बात करते हैं। भाजपा को समझना चाहिए कि सच्ची राजनीतिक विजय सड़क पर नहीं, बल्कि सकारात्मक कार्यों से आती है। इंदौर को स्वच्छ, सुंदर और विकसित शहर बनाने में लगी ऊर्जा, युवाओं को रोजगार देने वाले कार्यक्रम, दूषित पानी की समस्या का समाधान, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार – ये मुद्दे कांग्रेस की सारी कमियों को खुद-ब-खुद उजागर कर देते हैं।
हम भोजशाला (धार) में हिंदू समाज की आस्था को पूरा करने के लिए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। वहां पूर्ण मंदिर स्थापना, सनातन परंपराओं की रक्षा और हिंदू जागरण के मुद्दे हैं। अगर भाजपा इन सकारात्मक हिंदुत्व एजेंडों पर पूरा ध्यान दे, तो कांग्रेस के पास आलोचना करने को कुछ नहीं बचेगा। राम मंदिर की भव्यता, भोजशाला की गरिमा, गो-रक्षा, लव-जिहाद पर सख्ती, एंटी-कन्वर्जन कानून और सांस्कृतिक पुनर्जागरण – ये वे मुद्दे हैं जिन पर भाजपा को हिंदू संगठनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहिए।
राजनीति की एक प्राचीन कहावत है – “विरोधी को नजरअंदाज करो, वह खुद मर जाएगा।” लेकिन जब आप हर छोटी घटना पर उसके कार्यालय पहुंचकर घेराव करते हैं, तो आप उसे महत्व दे रहे होते हैं। इंदौर के नागरिक शांति चाहते हैं, विकास चाहते हैं, सड़क पर हिंसा नहीं। आज की झड़प ने व्यापारियों को दुकानें बंद करने पर मजबूर किया, आम लोगों में दहशत फैलाई। यह भाजपा की छवि को भी नुकसान पहुंचाता है।
भाजपा के सम्मानित कार्यकर्ताओं और नेताओं से मेरी विनम्र अपील है – रणनीति बदलिए। कांग्रेस को उसकी मरणासन्न अवस्था पर छोड़ दीजिए। उन्हें लगातार ‘नवजीवन’ देने की जरूरत नहीं। बल्कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के नेतृत्व में चल रहे विकास कार्यों को और तेज कीजिए। इंदौर को मॉडल सिटी बनाइए। हिंदू युवाओं को सशक्त बनाइए, उन्हें सनातन मूल्यों से जोड़िए। जब भाजपा का काम इतना चमकदार होगा कि कांग्रेस के पास आलोचना का कोई आधार नहीं बचेगा, तो वह खुद राजनीतिक कब्रिस्तान में चली जाएगी।
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन हमेशा राष्ट्रहित और हिंदू एकता के लिए तत्पर रहेगा। हम भाजपा से अपेक्षा करते हैं कि वह सड़क की राजनीति छोड़कर सकारात्मक राष्ट्र-निर्माण की राह अपनाए। हिंदुत्व की असली जीत दिलों को जोड़ने से होगी,
जय हिंद! जय भारत! जय सनातन! वंदे मातरम्!
(लेखक: विश्व हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष हैं। उनके विचार व्यक्तिगत हैं।)
