लेखक-जयेन्द्र जैन’निप्पूभैया
चन्देरी ,(माधव एक्सप्रेस)। मध्यप्रदेश का ऐतिहासिक नगर चन्देरी अपनी अनूठी संस्कृति, अद्भुत धरोहर और प्रसिद्ध चन्देरी साड़ियों के कारण सम्पूर्ण भारत में विख्यात है। किंतु इसके विकास की यात्रा में यदि किसी का विशेष योगदान रहा है, तो वह है सिंधिया राजपरिवार।
सिंधिया परिवार ने सदैव चन्देरी को केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि पर्यटन, संस्कृति और व्यापार की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण केंद्र माना। आजादी से पहले हो या आज़ादी के बाद—हर दौर में इस राजपरिवार ने चन्देरी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
रेलमार्ग की सौगात – समय की माँग
चन्देरी का वास्तविक विकास तब होगा जब यह नगर सीधे रेल मार्ग से जुड़ जाएगा।
आगामी 22–23 अगस्त को होने वाले “ज़ोर-ज़ोर” कार्यक्रम में यह माँग ज़ोर-शोर से रखी जानी चाहिए कि चन्देरी को शीघ्र रेल लाइन से जोड़ा जाए।
जैसा कि डॉ. जवाहर द्विवेदी गुना कहते हैं – “रेलमार्ग की सौगात मिलने से पर्यटन उद्योग आशानुरूप प्रगति करेगा, और इसमें सिंधिया राजपरिवार की खास भूमिका रही है।”
चन्देरी साड़ी और बुनकरों का उत्थान
चन्देरी की साड़ी आज विश्व भर में प्रसिद्ध है। बुनकरों को यदि आसान यातायात और व्यापारिक संपर्क मिलें, तो उनके जीवन स्तर में बड़ा परिवर्तन होगा। रेल लाइन इस दिशा में सबसे अहम कड़ी होगी।
ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण
सिंधिया राजपरिवार ने चन्देरी क़िले, बावड़ियों और जैन मंदिरों के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। रेल सुविधा आने से इन धरोहरों तक देशभर से पर्यटकों की सहज पहुँच संभव होगी।
निष्कर्ष
आज समय की माँग है कि चन्देरी को शीघ्र रेलमार्ग से जोड़ा जाए। इस दिशा में सिंधिया राजपरिवार की ऐतिहासिक भूमिका और वर्तमान पहल दोनों निर्णायक सिद्ध हो सकती हैं।
यदि आगामी ज़ोर-ज़ोर (22–23 अगस्त) के मंच से यह माँग प्रबलता से उठती है, तो निश्चय ही निकट भविष्य में चन्देरी एक राष्ट्रीय पर्यटन व व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित होगा ।
