उमंग सिंगार के करीबी स्वतंत्र जोशी की ताजपोशी का जश्न पलभर में बना विवाद का केंद्र, कांग्रेस कार्यकर्ताओं से ही उठे भाजपा समर्थक नारे, अंदरूनी गुटबाजी और घुसपैठ पर उठे गंभीर सवाल
धार (माधव एक्सप्रेस) धार ज़िले की राजनीति उस वक्त धरती हिला देने वाले सियासी धमाके का गवाह बनी जब कांग्रेस हाईकमान ने वरिष्ठ नेता उमंग सिंगार के सबसे भरोसेमंद सहयोगी स्वतंत्र जोशी को ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान सौंप दी। घोषणा होते ही कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया, लेकिन ये जश्न अचानक ही सियासी तूफ़ान में तब्दील हो गया। मंच से और भीड़ के बीच से अचानक गूंज उठे नारे — “मोदी ज़िंदाबाद, योगी ज़िंदाबाद”! पल भर में कांग्रेस का मंच भाजपा समर्थक नारों से कांप उठा। इस दृश्य का वीडियो मौके पर मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर डालते ही वह आग की तरह फैल गया। अब सवालों का तूफ़ान पार्टी आलाकमान तक पहुंच चुका है। कांग्रेस के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर कांग्रेस का कार्यकर्ता भाजपा का नारा क्यों लगाए क्या यह सिर्फ़ अनजाने में हुई गलती थी, या इसके पीछे कोई संगठित गुटबाजी, अंदरूनी असंतोष या भाजपा की घुसपैठ का खेल है उमंग सिंगार के करीबी माने जाने वाले स्वतंत्र जोशी की ताजपोशी को लेकर पहले से ही कुछ गुट असहज बताए जा रहे थे। अब भाजपा समर्थक नारों का उठना इस असहजता को खुला विद्रोह बना कर पेश कर रहा है। पार्टी सूत्र मान रहे हैं कि धार जिले की कांग्रेस इकाई पहले से ही खेमेबाज़ी और आपसी खींचतान से जूझ रही है। ऐसे में नए अध्यक्ष की ताजपोशी पर भाजपा के नारों का गूंजना पार्टी की साख और अनुशासन दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से ही भाजपा नेताओं का नाम लेकर समर्थन जताना कांग्रेस की उस विचारधारा और प्रतिबद्धता पर सवालिया निशान है, जिसका दम भरते हुए संगठन चुनावी समर में उतरता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके इस वीडियो पर विपक्ष ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा समर्थक इसे कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी बता रहे हैं और कह रहे हैं कि कांग्रेस के सिपाही भी मोदी–योगी की राह में हैं। वहीं, कांग्रेस खेमे के नेताओं की चुप्पी और अधिक संदेह खड़ा कर रही है। जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें अब इस बात पर टिक गई हैं कि पार्टी आलाकमान इस मामले में क्या रुख अपनाता है — क्या ये केवल एक जश्न का बहाव था, या सचमुच कांग्रेस की ज़मीनी पकड़ पर मंडरा रहा कोई बड़ा खतरा एक बात साफ़ है कि धार ज़िला कांग्रेस की राजनीति अब साधारण पटरी पर नहीं, बल्कि आग के दरिया में कूदने जैसी चुनौती के दौर में प्रवेश कर चुकी है। स्वतंत्र जोशी की ताजपोशी कांग्रेस के लिए एकता का पर्व बनती या नहीं, यह तो समय बताएगा, लेकिन भाजपा समर्थक नारों के गूंजने से पार्टी की अंदरूनी बगावत का चेहरा अब सबके सामने बेनकाब हो चुका है।
