आत्मा की शुद्धि और आत्मिक उन्नति का एक पवित्र पर्व
अश्विन चोपड़ा
उज्जैन: श्वेतांबर जैन समाज का पर्युषण महापर्व 20 अगस्त से शुरू होगे । जैन समाज में पर्युषण महापर्व का बहुत महत्व है।
अरविंद नगर पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेश भंडारी एवं कोषाध्यक्ष राकेश कोठारी ने संयुक्त रूप से बताया कि जैन समाज का पर्युषण पर्व आत्मा की शुद्धि और आत्मिक उन्नति का एक पवित्र पर्व है, जिसमें भक्तजन आत्म-अनुशासन, व्रत-उपवास, तपस्या और प्रार्थना द्वारा पांच महाव्रतों अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह का पालन करते हैं। यह पर्व समाज के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन होता है, जिसमें साधु-साध्वी प्रवचन देते हैं और भक्तगण धर्म-ग्रंथों का अध्ययन व आत्म-चिंतन करते हैं। पर्व का समापन क्षमावाणी के दिन होता है, जब अनुयायी एक-दूसरे से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगते हैं। पर्युषण पर्व के दौरान जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भगवान महावीर का जन्मोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें नृत्य नाटिकाएं भी शामिल होती हैं।
भेरूगढ़ मणिभद्र मंदिर के अध्यक्ष सुभाष दुग्गड ओर उपाध्यक्ष अश्विन मेहता ने बताया उज्जैन में जैन श्वेतांबर मंदिर में महापर्व मनाने की भव्य रूप से तैयारी चल रही है। इस आठ दिवसीय पर्व के दौरान, श्रद्धालु वीर प्रभु की आराधना करेंगे और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलेंगे। पर्यूषण पर्व जैन धर्मावलंबियों का महापर्व होता है। यह एक ऐसा पर्व है जब जैन धर्म को मानने वाले सभी लोग अपने जीवन पर चिंतन करते हैं और उन लोगों से क्षमा मांगते हैं, जिनके साथ उन्होंने गलत किया है। यह पर्व जैन धर्म के श्वेतांबर और दिगंबर दोनों संप्रदायों द्वारा मनाया जाता है। इस साल 20 अगस्त से 27 अगस्त तक श्वेतांबर जैन धर्मावलंबी पर्यूषण पर्व को मनाएंगे। पर्यूषण का शाब्दिक अर्थ चारों ओर से धर्म की आराधना करना होता है।
वर्धमान स्थानकवासी संघ नमक मंडी के मीडिया प्रभारी सुनील श्रीमाल ने बताया कि इस पर्व को जैन धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है। यह आत्मशुद्धि, आत्मनिरीक्षण और तपस्या का समय माना जाता है। महा पर्यूषण पर्व के दौरान श्रद्धालु स्थानक में आकर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे। यह पर्व विशेष रूप से आत्मसंयम, सत्य, अहिंसा और क्षमा की भावना को जागृत करने का समय है।
श्री आदेश्वर भगवान की पेड़ी आचार्य श्री विजयहीर सुरीश्वर बड़ा उपाश्रय उज्जैन के अध्यक्ष विमल पगारिया एवं सचिव राजेश पाटनी ने संयुक्त रूप से बताया कि मंदिर प्रबंधन ने सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। पूरा मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है। भक्तों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं के बीच उत्साह और धार्मिक आस्था की भावना चरम पर है। वे वीर प्रभु की आराधना में लीन होकर आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना कर रहे हैं। महा पर्यूषण पर्व के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। आठ दिन तक चलने वाले इस पर्व का समापन 27 अगस्त को होगा। इसमें श्रद्धालु क्षमापना दिवस मनाएंगे और एक-दूसरे से अपने विचारों और कर्मों के लिए क्षमा मांगेंगे। यह जैन धर्म का एक प्रमुख सिद्धांत है। श्रद्धालु इस पर्व का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।