उज्जैन । तुलसी जयंती के आयोजन में मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास कोकवि साहित्यकारों ने कि कविताओं के माध्यम से पुष्पांजलि अर्पित। जानकारी देते हुए माया बधेका ने बताया कि नील गंगा स्थित राम जानकी मंदिर आश्रम में विचार क्रांति साहित्य मंच के द्वारा तुलसी जयंती सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसमें अध्यक्षता प्रसिद्ध गीतकार हेमंत श्रीमाल ने कि वहीं मुख्य अतिथि डॉ शैलेन्द्र कुमार शर्मा कुलानुशासक, सारस्वत अतिथि पूर्व कुलपति डॉ बाल कृष्ण शर्मा ,विशिष्ट अतिथि चित्रकार श्रीकृष्ण जोशी साहित्यकार सुभाष गौड़ के साथ गीतकार सुगनचंद जैन ने मंच को सुशोभित किया।
विचार क्रांति साहित्य मंच द्वारा बाल कृष्ण शर्मा को तुलसी मानस सम्मान से सम्मानित किया साथ ही सेवा निवृत्त शिक्षक राजेंद्र जैन को शाल श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम संयोजक अनिल पांचाल सेवक ने कार्यक्रम का संचालन किया। मानस की प्रासंगिकता एवं आवश्यकता- विषय पर कुलानुशासक शैलेन्द्र शर्मा ने वक्तव्य प्रस्तुत किया। अध्यक्ष हेमंत श्रीमाल ने मधुर गीतों से कार्यक्रम में समा बांधा।
सारस्वत सम्मानित अतिथि बालकृष्ण शर्मा को *सम्मान पत्र* के साथ तुलसी का पौधा तुलसी की माला तुलसी का ग्रंथ व शाल श्रीफल के साथ पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। विचार मंच लगातार 11 वर्षों से किसी समाजसेवी या साहित्यकार को तुलसी मानस सम्मान से सम्मानित करता आ रहा है। कार्यक्रम में लगभग 50 महिला पुरुष साहित्यकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गौरवान्वित किया।
काव्य संध्या में अशोक भाटी अनुज पांचाल दिनेश अनल संगीता तल्लैरा सीमा जोशी शारदा श्री गोपाल कांवलिया बदनावर कमल पटेल
राजेन्द्र जैन दिलीप जैन डॉ अमरिश जैन डॉ अखिलेश चौरे मिथलेश त्रिवेदी वैभव बैरागी आदि ने काव्यपाठ कर तालियां बटोरी। नंदकिशोर पांचाल ने सम्मान पत्र का वाचन किया राजेश रावल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।इस अवसर पर खुश्बू बाफना अर्चना बाफना दीपक स्वामी अक्षय चवरे सत्यनारायण नाटाणी सत्येंद्र सेजमल कछवाय शुभम् शर्मा खुबचंद कलमोदिया सुदीप जैन कपील कुमावत नंदकिशोर चौहान बिजलीपुर महेश सोनी कागभुशुण्डि राकेश जैन सुरेन्द्र सत्संगी अमित जैन हर्ष सैनी सुनीता राठौर श्वैतिमा निगम आदि श्रोताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफलता प्रदान की । काव्य संध्या का संचालन हास्य व्यंग कवि सुरेन्द्र सर्किट ने किया।आभार विचार क्रांति साहित्य मंच के अध्यक्ष सुगनचंद जैन ने माना।