बड़ागाँव, जिला आगर मालवा /सावन… वो महीना है जब धरती पर देवों के देव महादेव की आराधना का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है।

झाड़ी बड़ागाँव का बाबा भोगेश्वर महादेव मंदिर सावन में मानो शिवलोक का साक्षात प्रतिबिंब बन जाता है। यहां हर सावन श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं की ऐसी गंगा बहती है, जिसमें हर भक्त का मन स्नान करता है।
प्रातः 5:30 बजे जैसे ही श्रृंगार की आरंभिक तैयारियाँ होती हैं, मानो समूचे गांव की सांसें थम जाती हैं और हर और गूंजने लगता है – “हर हर महादेव!”
महाकालेश्वर की तर्ज पर बाबा भोगेश्वर का दिव्य श्रृंगार होता है – रत्नजड़ित मुकुट, फूलों से लिपटी जटाएँ, त्रिपुंड और चंदन की रेखाएं, भंग और भस्म से सुशोभित अंग। यह श्रृंगार केवल बाहरी नहीं, श्रद्धालुओं के हृदय में बसे भावों का प्रतीक होता है। एवं यहां पर होने वाली महाआरती मन को लुभा लेती है।
मंदिर परिसर में जैसे ही भजन मंडली “ॐ नमः शिवाय” की धुन छेड़ती है, हर आंख नम और हर मन झूम उठता है।
“भोले बाबा की जयकारों से गूंजता आकाश, और कांपती धरा – ऐसा दृश्य केवल यहीं देखने को मिलता है।”

सिर्फ आगर मालवा ही नहीं, बल्कि शाजापुर, उज्जैन, रतलाम, देवास जैसे दूर-दराज़ अंचलों से भी श्रद्धालु यहाँ खिंचे चले आते हैं – अपने मन के अरमान, अपनी पीड़ा और अपनी आस्था लेकर।
यह सेवा कोई साधारण आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही भक्ति परंपरा है, जिसे
गोवर्धन लाल जी (पप्पू जी टेलर) की अगुवाई में वेदप्रकाश जी, राजेंद्र राव जी, अजय जी अग्रवाल , राहुल जी पाटीदार , गोपालजी टेलर , पारस जी जैन, शिवजी अग्रवाल, समध जी शर्मा , गोपाल जी पाटीदार, गोपालजी विश्वकर्मा, महेश जी दुबे , प्रहलाद जी यादव आदि जैसी समर्पित मंडली तन-मन-धन से निभा रही है।
पप्पू जी टेलर एवं उनके सहयोगी मित्र मंडली द्वारा बाबा का श्रृंगार सावन भर किया जाता है – ये श्रृंगार उनके हाथों में नहीं, उनकी आत्मा में होता है।
जब भक्तजन बाबा के दर्शन कर लौटते हैं, तो आँखें नम होती हैं – पर वो नमी दुःख की नहीं होती… वो होती है उस अनुभूति की, जो आत्मा को भीतर तक छू जाती है।


